
पटना, 01 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति की नर्सरी माने जाने वाले पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ है। लंबे अरसे बाद NSUI ने अध्यक्ष और महासचिव पद पर कब्जा जमाकर सबको चौंका दिया। अब तक ज्यादातर चुनावों में दबदबा रखने वाली ABVP इस बार मुख्य मुकाबले से ही बाहर हो गई। हार के बाद संगठन के भीतर मंथन शुरू हो गया है।

अध्यक्ष पद पर NSUI प्रत्याशी शांतनु शेखर ने जदयू के प्रिंस कुमार को 1496 मतों से हराया। शांतनु को 2896 वोट मिले, जबकि प्रिंस को 1400 मतों पर संतोष करना पड़ा। ABVP की प्रत्याशी अनुष्का तीसरे स्थान पर रहीं। वहीं महासचिव पद पर NSUI की खुशी कुमारी ने छात्र राजद के प्रत्यूष राज को 1611 मतों से शिकस्त दी। खुशी को 2164 वोट मिले, जबकि प्रत्यूष को 1611 मत प्राप्त हुए।इस जीत पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “PUSU में NSUI की प्रचंड जीत NEET छात्रा को न्याय दिलाने की जिद का प्रतिफल है।

”आखिर ABVP अपने ही गढ़ में क्यों हारी? संगठन से जुड़े सूत्र टिकट बंटवारे को बड़ा कारण बता रहे हैं। वर्षों से सक्रिय कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर अनुष्का को प्रत्याशी बनाए जाने पर संगठन में बगावत हुई। कार्यालय में तोड़फोड़ और फायरिंग तक की नौबत आ गई, लेकिन फैसला नहीं बदला गया। नतीजा—कई मजबूत छात्र नेता बागी बनकर मैदान में उतर गए।जातीय समीकरण भी निर्णायक रहे। विश्वविद्यालय में भूमिहार और यादव समुदाय के मतदाताओं की संख्या अधिक मानी जाती है। NSUI ने यादव प्रत्याशी उतारकर समीकरण साधा, जबकि ABVP में बगावत से वोट बंट गए। सूत्रों के मुताबिक, UGC फैक्टर और सवर्ण वोटों का ध्रुवीकरण भी परिणाम में अहम रहा। इस हार ने कैंपस की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

