नई दिल्ली, 05 नवम्बर (अशोक “अश्क”) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पर सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के कुछ ही दिनों बाद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में इस योजना को विशेष शर्तों के साथ फिर से शुरू करने पर विचार करना शुरू कर दिया है। तीन साल से अधिक समय से बंद इस योजना को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार लगातार केंद्र से आग्रह कर रही थी। अब संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र इस पर सकारात्मक कदम उठा सकता है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सूचित किया कि वह “विशेष परिस्थितियों” में पश्चिम बंगाल में मनरेगा को दोबारा शुरू करने पर विचार कर सकता है। PMO ने मंत्रालय से इस मुद्दे पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।
यह घटनाक्रम 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज किए जाने के बाद सामने आया है। केंद्र ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 18 जून के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि मनरेगा योजना को 1 अगस्त, 2025 से पश्चिम बंगाल में लागू किया जाए। हाईकोर्ट ने केंद्र को यह अधिकार दिया था कि वह योजना की बहाली के लिए विशेष शर्तें और नियम लागू कर सकता है ताकि भविष्य में किसी भी अनियमितता को रोका जा सके।
केंद्र ने यह आदेश लागू होने से ठीक एक दिन पहले, यानी 31 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी। लेकिन अदालत ने 27 अक्टूबर को याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 9 मार्च, 2022 को MGNREGA अधिनियम, 2005 की धारा 27 के तहत पश्चिम बंगाल को फंड जारी करना बंद कर दिया था। सरकार ने इसके पीछे केंद्रीय दिशानिर्देशों के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं का हवाला दिया था। इसके बाद से राज्य में मनरेगा के तहत कोई भी कार्य नहीं हुआ।
योजना के निलंबन से पहले 2014-15 से 2021-22 के बीच हर साल 51 से 80 लाख परिवार इसका लाभ उठाते थे। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय योजना को सख्त निगरानी और पारदर्शी नियमों के तहत बहाल करने की तैयारी कर रहा है, ताकि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।

