
पटना, 23 फरवरी (अविनाश कुमार) बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव की घोषणा होते ही सियासी पारा चढ़ गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नजर खासतौर पर पांचवीं सीट पर टिकी है। विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार चार सीटें एनडीए के खाते में जाती दिख रही हैं, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे तीन अतिरिक्त विधायकों की दरकार होगी। इसी बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से महागठबंधन की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पांचवीं सीट पर दावा ठोकते हुए सियासत गरमा दी है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और आरजेडी के कई विधायक उनके संपर्क में हैं और इस बार एनडीए पांचों सीटें जीतेगी। उनका यह भी कहना है कि विपक्ष क्रॉस वोटिंग के डर से प्रत्याशी उतारने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा।सूत्रों की मानें तो बीजेपी और जदयू जातीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। नीतीश कुमार सरकार में सवर्ण प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पार्टी ब्राह्मण और राजपूत चेहरे पर मंथन कर रही है। ऐसे में कुशवाहा का दावा कमजोर, जबकि सवर्ण चेहरे की संभावनाएं मजबूत बताई जा रही हैं।

गौरतलब है कि बिहार से राज्यसभा की 16 सीटों में से पांच पर 16 मार्च को मतदान होना है। एक सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है, जबकि महागठबंधन के पास 35 विधायक ही हैं। ऐसे में पांचवीं सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होता जा रहा है।

