नई दिल्ली, 18 सितम्बर (अशोक “अश्क”) कतर की राजधानी दोहा में हाल ही में आयोजित हुई बैठक में दुनिया के 60 मुस्लिम देशों ने इजरायल के हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की। इस बैठक में पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों ने एक “इस्लामिक नाटो” संगठन बनाने का प्रस्ताव रखा था, जो अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो (NATO) जैसा सुरक्षा गठबंधन होगा। हालांकि इस पहल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, लेकिन पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक अहम सुरक्षा समझौता किया है। इस समझौते के तहत, अगर एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों द्वारा एक संयुक्त हमले के रूप में देखा जाएगा, और दोनों देश एक-दूसरे को सुरक्षा गारंटी देंगे।

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह सुरक्षा समझौता, विशेष रूप से भारत के लिए महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान, जो भारत का चिर प्रतिद्वंद्वी रहा है, अब अपने सुरक्षा रिश्तों को इस्लामिक देशों के साथ और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इस समझौते के बाद, पाकिस्तान को यह महसूस हो रहा है कि उसे अब सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों का समर्थन मिलेगा। हालांकि, इस समझौते में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की कोई चर्चा नहीं की गई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने रिश्तों को और सुदृढ़ किया है।
भारत के लिए यह समझौता इसलिए अहम है क्योंकि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रक्षा संबंध रहे हैं। 1967 से पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा करार है, और पाकिस्तान ने सऊदी अरब के सैनिकों को प्रशिक्षण भी दिया है। हालांकि, सऊदी अरब ने इस समझौते के बाद भारत के साथ अपने रिश्तों को भी महत्त्वपूर्ण बताया है। अरब न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने कहा कि भारत के साथ उनके रिश्ते बहुत अच्छे हैं और वे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए अपने रिश्तों को और मजबूत करेंगे।
इस्लामिक देशों के बीच इस तरह के समझौतों का उद्देश्य इजरायल के खिलाफ एकजुटता को बढ़ाना है। हालांकि, इजरायल के खिलाफ हमेशा से मुस्लिम देशों में एकजुटता की भावना रही है, लेकिन कभी भी सभी देशों ने एक साथ आकर प्रतिकार करने का फैसला नहीं किया है। ऐसे में पाकिस्तान और सऊदी अरब का यह समझौता, इस क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच, एक नई दिशा की ओर इशारा कर रहा है।
इस समझौते के बाद, कुछ और मुस्लिम देशों के बीच भी ऐसे सुरक्षा समझौते होने की संभावना जताई जा रही है, जो इस्लामिक देशों के सामूहिक सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए बन सकते हैं।

