नई दिल्ली, 03 नवम्बर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान की नौसेना अगले साल चीन निर्मित पहली हैंगर क्लास पनडुब्बी को सक्रिय सेवा में शामिल करने जा रही है। पाकिस्तान नौसेना के प्रमुख एडमिरल नदीद अशरफ ने चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स को दिए गए साक्षात्कार में बताया कि इस रक्षा सौदे के तहत कुल आठ पनडुब्बियां 2028 तक पाकिस्तान को प्राप्त होंगी। यह सौदा फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और अन्य डिफेंस सिस्टम के बाद चीन द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली नई तकनीक का हिस्सा है।

करीब 5 अरब डॉलर के इस समझौते के तहत पहली चार पनडुब्बियां चीन में निर्मित की जा रही हैं, जबकि बाकी चार पाकिस्तान में असेंबल की जाएंगी। एडमिरल अशरफ ने कहा कि यह कदम पाकिस्तान की तकनीकी क्षमता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि चीन के हुबेई प्रांत में यांग्त्ज़ी नदी के किनारे स्थित शिपयार्ड से अब तक तीन पनडुब्बियां लॉन्च की जा चुकी हैं।
एडमिरल अशरफ ने कहा, “चीनी रक्षा उपकरण पाकिस्तान नौसेना की जरूरतों के अनुकूल, भरोसेमंद और तकनीकी रूप से उन्नत साबित हुए हैं। आधुनिक युद्ध में AI, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का महत्व लगातार बढ़ रहा है, और पाकिस्तान नौसेना इन तकनीकों के क्षेत्र में चीन के साथ सहयोग कर रही है।”
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान ने चीन के कुल हथियार निर्यात का 60% से अधिक हिस्सा खरीदा है। यह तथ्य दोनों देशों के बीच बढ़ती हुई रक्षा साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।
इस रक्षा सौदे के अलावा, चीन पाकिस्तान में अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC), जो चीन के शिंजियांग से ग्वादर बंदरगाह तक लगभग 3,000 किलोमीटर लंबा है, बीजिंग को मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह रणनीति पाकिस्तान को समुद्री और रणनीतिक क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और आर्थिक संबंधों को भी मजबूत करेगी। पाकिस्तान के लिए यह पनडुब्बियां आधुनिक युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण साबित होंगी।

