पूर्णिया, 18 सितंबर (राजेश कुमार झा) ये कोई फिल्म का टाइटल नहीं है.ये बिहार के राजनीति शतरंज की सबसे बड़ी विषाद है जो सीमांचल में बिछ चुकी है.खिलाड़ी का आना और खेलना शुरू हो चुका है.सभी खिलाड़ी अपने अपने स्टाइल में खेलने में खुद को माहिर समझ रहे है. प्रधानमंत्री जी जब 15 सितंबर को पूर्णिया आए तो उन्होंने सोचा कि हमसे बड़ा खिलाड़ी कोई हो ही नहीं सकता.लेकिन कहते है कि भीड़ कभी वोटर नहीं हो सकता.

कोई भी नेता या राजनीतिक पार्टी भीड़ देखकर भले ही बहुत खुश हो जाय,लेकिन उन्हें भी समझ में आता है कि ये भीड़ हमारी नहीं है.ये भीड़ सबकी है एवं सब में है.बताते चलें कि 15 सितंबर को पूर्णिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल जनसभा के समाप्त होते ही.सीमांचल सहित पूरे बिहार में खेला शुरू हो गया.सभी राजनीतिक दलों के बड़े बड़े नेताओं ने अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं को लेकर राजनीतिक मैदान में खेला शुरू कर दिया है.बताते चलें कि पूरे सीमांचल में विधानसभा की कुल 24 सीटें है.जिसमें तकरीबन 12 सीटों पर मुसलमानों का सिक्का चलता है.इन सभी 12 सीटों पर मुसलमान जिसे चाहेंगे उसकी जीत पक्की कही जाती है.बताते चलें कि सीमांचल की 24 सीटें का आंकड़ा ये है कि 2020 की विधानसभा में एनडीए को कुल 9 सीटें ही मिली थी.दूसरी तरफ महागठबंधन को 10 सीटें मिली थीं.लेकिन 5 सीटें जीतकर सबसे बड़ा चमत्कार AIMIM ने किया.लेकिन इस बार 2025 के विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने सीमांचल24 की जीत के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है.अब सभी राजनीतिक दलों का एक ही मिशन है सीमांचल24 बताते चलें कि एनडीए गठबंधन ने इस बार सीमांचल24 पर काम करना शुरू कर दिया है.लेकिन एनडीए के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है वो 12 सीट.जिसकी हार-जीत मुसलमान तय करते है.दूसरी तरफ मुसलमान और यादव को अपना वोटर समझने वाले राजद एवं कांग्रेस यानि महागठबंधन इस बार पूरे सीमांचल की सीटों पर अपना दबदबा कायम करने की पूरी तैयारी कर ली है.लेकिन इनको टक्कर देने आ गए है जनसुराज.लेकिन देखना ये है कि जनता जनसुराज को कितना तवज्जो देती है.

