
पटना, 20 फरवरी (पटना डेस्क) आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता, लेकिन बंपर पैदावार के लिए किसानों को फरवरी और मार्च में खास सतर्कता बरतनी होगी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यही वह समय है जब आम के पेड़ों पर बौर निकलते हैं और फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इस दौरान की गई छोटी सी लापरवाही फूल झड़ने और पैदावार घटने का बड़ा कारण बन सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी में जब पेड़ों पर बौर आ रहे हों, तब सिंचाई बेहद सीमित रखें या बिल्कुल न करें।

अधिक पानी देने से नई पत्तियां निकलने लगती हैं और फूल कमजोर पड़ जाते हैं। जब मटर के दाने जितने छोटे फल दिखने लगें, तभी हल्की सिंचाई शुरू करें। मार्च में फल वृद्धि के दौरान नियमित लेकिन नियंत्रित पानी दें। ड्रिप सिंचाई को सबसे कारगर माना गया है, क्योंकि इससे जड़ों तक संतुलित नमी पहुंचती है और पानी की बचत भी होती है।खाद प्रबंधन भी उतना ही अहम है। गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक खाद डालें। साथ ही बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें। पोटैशियम युक्त उर्वरक जैसे एनपीके 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट को 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करने से एक मंजर से 8-10 आम तक लग सकते हैं।

इस मौसम में मधुआ, गुझिया और हॉपर जैसे कीट तथा झुलसा रोग बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं। फरवरी में ही दो चरणों में स्प्रे करें। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सलाह से दवा का प्रयोग करें। साथ ही पेड़ों के नीचे मल्चिंग करें और सूखी-बीमार टहनियों की हल्की छंटाई कर धूप-हवा का उचित प्रवाह सुनिश्चित करें। सही देखभाल से इस बार आम की पैदावार दोगुनी हो सकती है।

