
बक्सर, 30 जनवरी (विक्रांत) जिले में विद्यालयी शिक्षा को व्यवहारिक, नवाचारी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया। शनिवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), डुमरांव के प्रांगण में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (PBL) एवं माइक्रो इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (MIP) को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर एक दिवसीय बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का उद्देश्य तकनीकी अनुसमर्थन प्रदान करना, क्रियान्वयन की प्रक्रिया को मजबूत करना तथा सुदृढ़ और पारदर्शी रिपोर्टिंग व्यवस्था सुनिश्चित करना रहा।कार्यशाला में जिले के सभी 11 प्रखंडों के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, प्रत्येक प्रखंड से चार-चार सदस्यीय प्रखंड स्तरीय तकनीकी टीम तथा जिला तकनीकी टीम के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ डायट के प्राचार्य विवेक मौर्य के मार्गदर्शक संबोधन से हुआ। उन्होंने PBL और MIP को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को रुचिकर, सहभागी और व्यावहारिक बनाने का सशक्त माध्यम बताया तथा विद्यालय स्तर पर इसके नियमित और गंभीर क्रियान्वयन पर जोर दिया।

इस अवसर पर वरीय व्याख्याता नवनीत सिंह ने MIP के गुणवत्तापूर्ण निष्पादन, साक्ष्य संकलन और रिपोर्टिंग में आ रही कमियों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए ठोस सुधारात्मक सुझाव दिए। डुमरांव के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने भी PBL एवं MIP की भूमिका और इसके शैक्षणिक प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला।एडीपीसी रवि भूषण सहनी ने PBL–MIP की आवश्यकता, लक्ष्य समूह निर्धारण, जवाबदेही तय करने, परियोजना विकास, दीक्षा प्लेटफॉर्म पर अपलोड, विद्यालयों में क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग और चरणबद्ध रिपोर्टिंग प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्टिंग केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि तकनीकी समस्याओं की पहचान और समाधान का आधार है।जिला तकनीकी टीम के सदस्यों ने प्रोफाइल और विद्यालय मैपिंग, साक्ष्य अपलोड व सिंकिंग, प्रमाण-पत्र निर्गत होने में विलंब जैसी तकनीकी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान भी साझा किए।

साथ ही प्रखंड स्तरीय टीमों को निर्देश दिया गया कि वे नियमित समीक्षा कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।बैठक में सीआरसी, प्रखंड और जिला स्तर पर एकरूप रिपोर्टिंग प्रणाली और समय-सीमा तय करने पर सहमति बनी। अंत में यह रेखांकित किया गया कि PBL–MIP का मूल उद्देश्य कक्षा की अंतिम पंक्ति में बैठे अंतिम बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण और करके सीखने वाली शिक्षा पहुंचाना है। सभी प्रतिभागियों ने जिले की शैक्षिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

