
नई दिल्ली, 01 फरवरी (अशोक “अश्क”) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के कायाकल्प के लिए ऐसा रोडमैप पेश किया है, जो देश की परिवहन तस्वीर को पूरी तरह बदल देगा। सरकार ने देश के प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ने के लिए सात नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है। इन कॉरिडोर पर बुलेट ट्रेन की तर्ज पर हाई स्पीड ट्रेनें चलेंगी, जिनकी संभावित गति 250 से 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी।

वित्त मंत्री के ऐलान के मुताबिक मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाई स्पीड रेल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। मुंबई पुणे कॉरिडोर से आर्थिक राजधानी और आईटी हब के बीच यात्रा समय घंटों से मिनटों में सिमट जाएगा। दिल्ली वाराणसी लाइन राष्ट्रीय राजधानी को धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र से जोड़ेगी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है।दक्षिण भारत में हैदराबाद बेंगलुरु और बेंगलुरु चेन्नई कॉरिडोर टेक्नोलॉजी, उद्योग और बंदरगाह कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देंगे। दिल्ली अहमदाबाद कॉरिडोर को मुंबई अहमदाबाद बुलेट परियोजना के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जबकि मुंबई नागपुर लाइन समृद्धि महामार्ग के समानांतर राज्य के विकास को गति देगी।

हावड़ा वाराणसी कॉरिडोर पूर्वी भारत को राष्ट्रीय हाई स्पीड नेटवर्क से जोड़ेगा।रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में सरकार 2026 के अंत तक 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को उतारने की तैयारी में है, जो राजधानी एक्सप्रेस की जगह लेंगी। साथ ही स्वदेशी एंटी कोलिजन प्रणाली कवच के नवीनतम संस्करण को 44000 रूट किलोमीटर तक विस्तारित करने का प्रस्ताव भी बजट में रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश रोजगार सृजन, क्षेत्रीय संतुलन, तेज लॉजिस्टिक्स, पर्यटन वृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देगा तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय रेलवे की छवि को नई पहचान दिलाएगा आने वाले वर्षों में निश्चित।

