नई दिल्ली, 22 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) बांग्लादेश में तीस्ता मास्टर प्लान को लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं। 19 अक्टूबर को चटगांव यूनिवर्सिटी में सैकड़ों लोगों ने मशाल लेकर ह्यूमन चेन बनाई और नारेबाज़ी करते हुए मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने तीस्ता नदी के पानी में बांग्लादेश को न्यायपूर्ण हिस्सा देने और योजना को तुरंत लागू करने की अपील की।

यह योजना चीन के समर्थन से बनाई गई है, जिसे लेकर भारत में रणनीतिक चिंता गहराई है, खासतौर पर क्योंकि यह इलाका भारत के संवेदनशील ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के बेहद करीब स्थित है।
प्रदर्शन रंगपुर डिवीजन के छात्रों द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें भारत पर जल नीति में प्रभाव डालने का आरोप लगाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह योजना बांग्लादेश के उत्तर हिस्से में खेती, रोजगार और आर्थिक विकास में मदद कर सकती है।
इससे पहले उत्तर बांग्लादेश के पांच जिलों में भी मशाल रैलियां निकाली गई थीं। बांग्लादेश का आरोप है कि सूखे मौसम में भारत तीस्ता नदी का पानी रोक देता है, जिससे बांग्लादेश में खेती और पीने के पानी की कमी हो जाती है।
चीन की मदद से तैयार यह मास्टर प्लान भारत के लिए सुरक्षा चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की संभावित भागीदारी से वह भारत के सैन्य ठिकानों और गतिविधियों पर निगरानी रख सकता है।
रणनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेल्लानी ने चेतावनी दी है कि लालमोनिरहाट में चीनी गतिविधियां भारत की सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि बांग्लादेश सरकार ने सफाई दी है कि एयरबेस केवल घरेलू जरूरतों और एविएशन यूनिवर्सिटी के लिए है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुद्दा सिर्फ जल बंटवारे का विवाद नहीं, बल्कि भारत-चीन-बांग्लादेश के बीच उभरती भू-राजनीतिक खींचतान का संकेत भी है, जो आगामी चुनावों में भी असर डाल सकता है।

