नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) बांग्लादेश में मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार के दौरान पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (ISI) ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। एक ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने ढाका स्थित अपने उच्चायोग में एक स्पेशल ISI सेल की स्थापना की है। यह जानकारी शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, यह कदम पाकिस्तान के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी चेयरमैन जनरल साहिर शमशाद मिर्जा की हालिया चार दिवसीय ढाका यात्रा के बाद उठाया गया। जनरल मिर्जा को पाकिस्तानी सेना में फील्ड मार्शल असीम मुनीर के बाद दूसरा सबसे शक्तिशाली अधिकारी माना जाता है। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने न केवल मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से भेंट की बल्कि बांग्लादेश की थल, वायु और नौसेना के प्रमुखों से भी मुलाकात की।
जनरल मिर्जा के साथ आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंचा था, जिसमें *ISI के एक मेजर जनरल, पाकिस्तान वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रतिनिधिमंडल ने बांग्लादेश की *राष्ट्रीय सुरक्षा खुफिया एजेंसी (NSI) और सेना खुफिया महानिदेशालय (DGFI) के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की।
खुफिया सूत्रों का दावा है कि इन बैठकों में दोनों पक्षों ने संयुक्त खुफिया-साझाकरण और सहयोग ढांचा तैयार करने पर सहमति जताई है। इस ढांचे का मुख्य उद्देश्य बंगाल की खाड़ी और भारत के पूर्वी तट के हवाई क्षेत्र की निगरानी करना बताया जा रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश ने पाकिस्तान को अपने ढाका उच्चायोग में खुफिया अधिकारियों की औपचारिक तैनाती की अनुमति भी दे दी है। पहले चरण में यहां एक ब्रिगेडियर, दो कर्नल, चार मेजर, तथा पाकिस्तानी वायुसेना और नौसेना के अधिकारी तैनात किए जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक, ISI को बांग्लादेश में प्रवेश की इजाजत के बदले पाकिस्तान ने सैन्य और तकनीकी सहायता की पेशकश की है। बांग्लादेश ने JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों और फतह सीरीज रॉकेट प्रणालियों में विशेष रुचि दिखाई है। इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच रक्षा सौदों को अंतिम रूप देने के लिए एक उच्च स्तरीय बांग्लादेशी सैन्य प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पाकिस्तान का दौरा कर सकता है।
यह घटनाक्रम भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि ISI की बढ़ती मौजूदगी दक्षिण एशिया में नए भू-राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकती है।

