समस्तीपुर, 6 सितंबर (राजेश झा) रोसड़ा प्रखंड क्षेत्र के धान उत्पादक किसान इस वर्ष मानसून की बेरुखी से बेहद चिंतित हैं। धान की खेती इस इलाके की प्रमुख खेती है, लेकिन बारिश की कमी के कारण खेतों में लगे पौधे सूखने लगे हैं। पानी के अभाव में धान की फसल कमजोर हो रही है और किसानों को उत्पादन घटने का डर सता रहा है।क्षेत्र के कई गांवों के किसान बताते हैं कि जुलाई–अगस्त के महीने में अच्छी बारिश न होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं।

धान की फसल को इस समय पर्याप्त पानी की जरूरत होती है, लेकिन नमी न मिलने के कारण पौधों की बृद्धि रुक गई है। रासायनिक खाद डालने के बावजूद पौधों का रंग पीला पड़ने लगा है।बारिश के अभाव में किसान निजी पंपसेट से खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। लेकिन इसमें भी परेशानी कम नहीं है। बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण मोटर से पटवन करना मुश्किल हो रहा है। वहीं, डीजल चालित पंपसेट से सिंचाई करने पर लागत कई गुना बढ़ गई है। किसान बताते हैं कि 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर डीजल खरीदना पड़ रहा है।

लगातार सिंचाई करने से प्रति बीघा हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि धान की पैदावार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।किसानों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि सरकार की ओर से अब तक डीजल अनुदान की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। हर साल मानसून की असमानता को देखते हुए राज्य सरकार डीजल अनुदान देती है, ताकि किसान सिंचाई कर सकें। लेकिन इस बार अनुदान में देरी होने से किसान अपने संसाधनों के भरोसे खेती बचाने की कोशिश कर रहे हैं। गांव के किसान राजेश राय कहते हैं कि “बारिश न होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं। मजबूरी में डीजल पंप से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन लागत इतनी बढ़ रही है कि फायदा नहीं होगा। सरकार अगर जल्दी डीजल अनुदान नहीं देगी तो किसान कर्ज में डूब जाएंगे।” वहीं किसान मनोज कुमार ने बताया कि “धान की फसल में इस समय पानी नहीं मिलने पर उत्पादन आधा रह जाएगा। पहले ही खाद और बीज महंगे हो गए हैं, ऊपर से पानी की मार झेलनी पड़ रही है।”
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले दो हफ्ते में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी ।किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से शीघ्र राहत उपाय की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो धान की खेती पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।

