भागलपुर, 20 सितम्बर (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में शनिवार को राज्य समन्वित किस्म परीक्षण (SCVT) रबी 2025-26 की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता बीएयू के निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने की। इस बैठक का उद्देश्य था राज्य के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में परखी गई फसल किस्मों के बहु-वर्षीय आंकड़ों के आधार पर किसानों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त, उच्च उत्पादक एवं जलवायु-अनुकूल किस्मों का चयन करना।

बैठक में गेहूं, सरसों और चना की कई उन्नत किस्मों को बिहार के लिए अनुशंसित किया गया।
गेहूं की प्रमुख किस्में:
BRW 3954 (बीएयू सबौर) विलंबित बुआई में 37 क्विंटल/हेक्टेयर से अधिक उपज देती है।
RAUW 120 (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय) 60 क्विंटल/हेक्टेयर की क्षमता रखती है।
DBW 303 (आईसीएआर-करनाल) रोग प्रतिरोधी और गुणवत्ता में श्रेष्ठ मानी गई।
सरसों की किस्म:
BRBJ 02 (बीएयू) 41% तेल अंश और 1672 किग्रा/हेक्टेयर औसत उपज के साथ बेहतर विकल्प साबित हुई है।
चना की किस्म:
DBGC 1 (आईसीएआर-पटना) बड़ी दानों वाली, 130 दिन में परिपक्व और उच्च प्रोटीन युक्त है।
बैठक में डीआरपीसीएयू, आईएआरआई, आईसीएआर, आरसीईआर और बीएयू के कई शीर्ष वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
डॉ. डी.आर. सिंह (कुलपति, बीएयू) ने कहा, “ये किस्में बिहार की खाद्य व पोषण सुरक्षा में मील का पत्थर बनेंगी।”
अब इन किस्मों को रिसर्च काउंसिल मीटिंग (RCM) में प्रस्तुत कर अधिसूचना, बीज उत्पादन और विस्तार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

