पटना, 23 सितंबर (निज संवाददाता) बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। इस बार चुनावी अखाड़े में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पीके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के सबसे प्रभावशाली चुनावी मुद्दे ‘भ्रष्टाचार’ को ही अपना ‘ब्रह्मास्त्र’ बना लिया है।

प्रशांत किशोर ने खुले मंच से भाजपा के चार बड़े नेताओं प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, सम्राट चौधरी, संजय जायसवाल और मंगल पांडे पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। पीके का दावा है कि ये नेता सत्ता का दुरुपयोग कर जनता के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 2014 में नरेंद्र मोदी ने “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” के नारे के साथ भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाकर सत्ता में दस्तक दी थी। उस वक्त चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रशांत किशोर ही उनके साथ थे। अब वही रणनीति पीके ने भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल कर दी है।
पीके के इन आरोपों से भाजपा के भीतर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कुछ नेता इन आरोपों को लेकर आलाकमान से जवाब मांग रहे हैं। अगर भाजपा इन आरोपों को नजरअंदाज करती है, तो इससे पार्टी की छवि पर आंच आ सकती है। वहीं, यदि कार्रवाई होती है, तो इससे आंतरिक कलह भी गहराने का खतरा है।
बिहार की राजनीति में पीके के इस कदम को बड़ा ‘चुनावी खेला’ माना जा रहा है। उन्होंने न सिर्फ भाजपा की सबसे मजबूत छवि पर हमला किया है, बल्कि चुनावी मुद्दों की दिशा भी बदल दी है। अब देखना यह है कि क्या भाजपा अपने पुराने वादे “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” को दोहराएगी या चुप्पी साधे रखेगी।

