बांका (अशोक “अश्क”) बिहार के बांका जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शंभूगंज प्रखंड के एक मृत शिक्षक निरंजन कुमार पर निगरानी विभाग ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराई है, जबकि शिक्षक की मौत पांच साल पहले 2020 में ही हो चुकी है।

शिक्षक के परिजन इस मामले से सकते में हैं। उन्होंने बताया कि निरंजन कुमार की मौत कोरोना काल के दौरान हुई थी और इसकी सूचना बीआरसी कार्यालय से लेकर जिला शिक्षा कार्यालय तक दी गई थी। उन्होंने मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि संबंधित कार्यालयों को पहले ही भेज दी थी। इसके बावजूद गुरुवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने शंभूगंज थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी।
निरंजन कुमार, मिर्जापुर पंचायत के सोनडीह गांव निवासी थे और प्राथमिक विद्यालय मेहरपुर में शिक्षक के पद पर तैनात थे। शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में उनके प्रमाण पत्र की जांच नहीं हो सकी थी, लेकिन जब निगरानी टीमbने जिम्मा संभाला तो उनके शैक्षणिक दस्तावेजों में जालसाजी पाई गई।
थानाध्यक्ष मंटू कुमार ने बताया कि शुक्रवार को मृतक के परिजनों ने थाने में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर दिया है और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इसी जांच में एक अन्य शिक्षिका पल्लवी कुमारी, जो प्राथमिक विद्यालय जगतापुर में कार्यरत थीं, का नाम भी सामने आया है। उनके शैक्षणिक दस्तावेज भी फर्जी पाए गए हैं। बता दें कि पल्लवी कुमारी साल 2018 से लापता हैं और विद्यालय नहीं आ रही हैं।
इस मामले ने न सिर्फ शिक्षा विभाग की लापरवाही, बल्कि निगरानी विभाग की सतर्कता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि मृत व्यक्ति पर दर्ज मामले को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

