पटना, 11 सितंबर (अशोक “अश्क”) बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, और आगामी महीने के अंत तक चुनाव की तिथि का ऐलान होने की संभावना जताई जा रही है। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, बिहार चुनाव के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर की दो विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव घोषित किए जा सकते हैं। यह उपचुनाव पिछले एक साल से लंबित हैं, और अब आयोग ने इन्हें आयोजित करने की योजना बनाई है।

बीते साल जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था। वह दोनों सीटों से विजयी रहे, लेकिन उन्होंने गांदरबल सीट से विधायक बने रहने का फैसला लिया, जबकि बडगाम सीट को छोड़ दिया। इसके बाद से ही बडगाम सीट खाली पड़ी हुई है। इसके अलावा नगरोटा विधानसभा सीट भी रिक्त हो गई थी, जब वहां के विधायक देवेंदर सिंह राणा का निधन हो गया था।
इस प्रकार, इन दोनों सीटों पर चुनाव की जरूरत है। भारतीय संविधान के तहत, यदि किसी सीट पर चुनाव नहीं हो पाता तो चुनाव आयोग को छह महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है। अगर किसी कारणवश चुनाव नहीं हो पाते, तो केंद्र सरकार की सलाह पर इसे छह महीने तक के लिए टाला जा सकता है, लेकिन इसके लिए उचित कारण भी बताना पड़ता है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान इन उपचुनावों को आयोजित करने की योजना थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे टाल दिया गया। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद इन चुनावों को लगातार स्थगित किया गया। अब बिहार विधानसभा चुनाव के साथ इन उपचुनावों को भी आयोजित करने की संभावना है।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा की चार सीटों के चुनाव भी जल्दी कराए जा सकते हैं। इन सीटों पर चुनाव इसलिए जरूरी हो गए हैं क्योंकि इनका प्रतिनिधित्व करने वाले चार सांसदों का कार्यकाल फरवरी 2021 में समाप्त हो चुका था। इन सीटों पर चुनाव होने की कोई ठोस तारीख अब तक घोषित नहीं की गई है। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का नाम भी शामिल है, जो अब तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं और कांग्रेस से भी उन्होंने दूरी बना ली है।
इस स्थिति में, राज्यसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस किसे मैदान में उतारती है। फिलहाल, भाजपा और उमर अब्दुल्ला की पार्टी दोनों ही राज्यसभा में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए इन चुनावों पर नजर जमाए हुए हैं।
बिहार और जम्मू-कश्मीर में चुनावों के साथ-साथ राज्यसभा की सीटों पर होने वाले चुनावों को लेकर सभी की निगाहें हैं। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इन चुनावों के लिए कब और कैसे तारीखें घोषित करता है, और इन चुनावों के परिणाम किस प्रकार राजनीतिक बदलावों का कारण बनते हैं।

