पटना, 12 सितम्बर (अशोक “अश्क”) उपराष्ट्रपति चुनाव में दिखाई गई एकजुटता के बाद अब भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन पूरी ताकत के साथ बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी में लग गया है। सीट बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला भले ही अभी नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने सहयोगी दलों की भूमिका को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस माह के अंत तक सीटों के बंटवारे पर निर्णय लिया जा सकता है। भाजपा ने सभी सहयोगियों को यह स्पष्ट कर दिया है कि सीटों का वितरण उनकी राजनीतिक ताकत और प्रदर्शन के आधार पर होगा, न कि किसी के दबाव में आकर।
गठबंधन में बराबरी की बात, “कोई बड़ा या छोटा भाई नहीं”

भाजपा ने साफ कर दिया है कि एनडीए में कोई ‘बड़ा भाई’ या ‘छोटा भाई’ नहीं होगा, बल्कि सभी दल बराबरी के सहयोगी होंगे। यह संदेश खास तौर पर जेडीयू के उस रुख को संतुलित करने के लिए दिया गया है, जो अक्सर ‘बड़े भाई’ की भूमिका का दावा करता रहा है।
सीटों का बंटवारा प्रदर्शन के आधार पर:
भाजपा सूत्रों के अनुसार, सीटों का वितरण पिछली विधानसभा और लोकसभा चुनावों में प्रदर्शन, सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव और विपक्ष की रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा। भाजपा और जेडीयू के बाद सबसे ज्यादा सीटें लोजपा (रामविलास) को दी जाएंगी, जिसका 2024 लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन प्रभावशाली रहा था।
अन्य सहयोगी दलों की स्थिति
एनडीए में शामिल अन्य दलों जैसे हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) और रालोसो (राष्ट्रीय लोक जनता दल) को भी उनकी राजनीतिक ताकत और रणनीतिक महत्त्व के आधार पर सीटें दी जाएंगी। भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ सांकेतिक भागीदारी नहीं होगी, बल्कि हर दल की भूमिका तय करने में **वास्तविक जमीनी प्रभाव को प्राथमिकता दी जाएगी।
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान
सीट बंटवारे में केवल गठबंधन के भीतर संतुलन ही नहीं, बल्कि बिहार के सामाजिक, जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को भी ध्यान में रखा जाएगा। भाजपा चाहती है कि विपक्षी महागठबंधन की रणनीति का जवाब सीट वितरण में ही दे दिया जाए, ताकि पूरे राज्य में चुनाव पूर्व ही एनडीए की एकता और ताकत का संदेश जाए।
बिहार की राजनीति में सीट बंटवारे को लेकर अकसर ‘बड़े भाई-छोटे भाई’ का विवाद सामने आता रहा है, लेकिन इस बार भाजपा ने शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया है कि यह गठबंधन बराबरी का होगा। अब निगाहें इसी माह के अंत तक होने वाले सीट वितरण के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि 2025 के चुनावी रण में एनडीए किस रणनीति के साथ उतरता है।

