पटना, 3 सितम्बर (अशोक “अश्क”) बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में करीब 5.5 लाख मतदान कर्मियों की तैनाती की जाएगी, जो पीठासीन पदाधिकारी, मतदान कर्मी, माइक्रो ऑब्जर्वर और सेक्टर मजिस्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण दायित्व संभालेंगे। इन कर्मियों को राज्य भर में बनाए जा रहे 90,712 मतदान केंद्रों पर जिम्मेदारी दी जाएगी।

निर्वाचन विभाग के सूत्रों के अनुसार, जिलों में जिलाधिकारी स्तर पर आवश्यकतानुसार मतदान कार्मिकों की सूची तैयार की जा रही है। यह प्रक्रिया सितंबर के अंत तक पूरी कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद चुनाव की घोषणा होते ही प्रशिक्षण का कार्य शुरू हो जाएगा, जो तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।
प्रशिक्षण में ईवीएम और वीवीपैट मशीन के संचालन, निर्वाचन पत्रों का संधारण और मतदान प्रक्रिया से जुड़े नियमों की जानकारी दी जाएगी। मतदान कार्मिकों को प्रशिक्षित करने के लिए राज्य मुख्यालय पर मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं, जो बाद में जिले स्तर पर कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे।
हर मतदान केंद्र पर एक पीठासीन पदाधिकारी और तीन पोलिंग अफसर तैनात किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त माइक्रो ऑब्जर्वर और सेक्टर मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए जाएंगे ताकि मतदान प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारु बनी रहे।
पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदान केंद्रों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। 2020 के चुनाव में लगभग 78 हजार केंद्र थे, जबकि इस बार प्रत्येक केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाता निर्धारित किए जाने के कारण कुल केंद्रों की संख्या 90,712 होने का अनुमान है।
मतदान कर्मियों की संख्या बढ़ने के कारण बड़ी संख्या में रिजर्व कार्मिकों की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार के कार्यालयों से कर्मियों की सूची मांगी गई है। इनकी रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से तैनाती की जाएगी।
इसके अलावा, केंद्रीय बलों और बिहार पुलिस की तैनाती भी की जाएगी। बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से गृह मंत्रालय को बलों की आवश्यकता की अनुशंसा भेजी गई है, ताकि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

