पटना, 14 अक्तूबर (पटना डेस्क) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने चारा मक्का की मल्टी-कट किस्म विकसित करने के लिए मक्का के जंगली पूर्वज टियोसिन्टे पर आधारित अनुसंधान की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य हरी चारा की उपलब्धता, बायोमास उत्पादन और पोषण गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, जिससे राज्य के पशुपालक किसानों को सीधा लाभ मिल सके।

इस नवाचार की घोषणा आईसीएआर–भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना की उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग टीम के बीएयू दौरे के दौरान हुई। टीम ने मक्का प्रजनन, कीट और रोग प्रबंधन तथा कृषि तकनीकों का गहन निरीक्षण किया।
टीम के प्रमुख डॉ. एन. के. सिंह ने टियोसिन्टे जर्मप्लाज्म साझा करने का आश्वासन देते हुए इसकी संभावनाओं को रेखांकित किया। वहीं, कीट वैज्ञानिक डॉ. सौजन्या पी. एल. ने बीएयू को फॉल आर्मी वॉर्म जैसी चुनौतियों के लिए क्षेत्रीय केंद्र बनाने का सुझाव दिया।
डॉ. ए. के. सिंह, निदेशक अनुसंधान, बीएयू ने कहा, “टियोसिन्टे आधारित किस्में बिहार के पशुपालकों के लिए चारा सुरक्षा का समाधान होंगी।” कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने इसे मक्का अनुसंधान में एक वैज्ञानिक उपलब्धि बताया।
यह शोध न केवल हरी चारा की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि किसानों की आयवृद्धि में भी सहायक सिद्ध होगा।

