बक्सर, 10 नवम्बर (विक्रांत) भारत के डिजिटल कृषि परिवर्तन में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा “कृषक सहायता हेतु एआई युग में नेक्स्ट जेन ई-एक्सटेंशन” विषय पर 21-दिवसीय उन्नत संकाय प्रशिक्षण केंद्र (सीएएफटी) कार्यक्रम आयोजित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह कार्यक्रम वर्ष 2025–26 के दौरान आईसीएआर के कृषि प्रसार प्रभाग, नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित होगा।

यह पहल कृषि वैज्ञानिकों और प्रसार विशेषज्ञों की क्षमता निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), बिग डेटा एनालिटिक्स और आईसीटी आधारित उपकरणों का उपयोग कर किसानों को रीयल-टाइम, सटीक और भविष्यवाणी आधारित परामर्श सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे।

सीएएफटी कार्यक्रम में एआई आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली का विकास, बहुभाषीय डिजिटल कंटेंट और ज्ञान नेटवर्क की स्थापना, आईओटी, ड्रोन और डेटा-आधारित मॉडल्स का उपयोग कर कृषि परामर्श सेवाओं को सशक्त बनाना तथा एआई सक्षम ज्ञान प्रबंधन प्रणाली को कृषि विश्वविद्यालयों और केवीके नेटवर्क में मुख्यधारा में लाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह भारत सरकार के डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर कृषि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विकसित भारत@2047 मिशनों के उद्देश्य को सशक्त बनाता है।
बीएयू, सबौर ने डिजिटल कृषि प्रसार में राष्ट्रीय नेतृत्व स्थापित किया है। विश्वविद्यालय का यूट्यूब चैनल 4.5 लाख से अधिक सब्सक्राइबर तक पहुंच चुका है और एआई समर्थित कृषि सामग्री विकसित कर किसानों तक जटिल तकनीकों को सरल भाषा में पहुँचाया जा रहा है।
कुलपति प्रो. (डॉ.) डी. आर. सिंह ने कहा कि यह स्वीकृति बीएयू की डिजिटल कृषि और ज्ञान आधारित ग्रामीण विकास में नेतृत्व की पुष्टि करती है। अनुसंधान निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यह प्रशिक्षण नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों और प्रसार विशेषज्ञों को डेटा को निर्णय में और ज्ञान को प्रभाव में बदलने में सक्षम बनाएगा।
आईसीएआर-प्रायोजित यह पहल भारत में एआई संचालित कृषि आधुनिकीकरण और स्मार्ट कृषि के लिए रणनीतिक महत्व रखती है, जिससे बीएयू सबौर डिजिटल कृषि नवाचार के अग्रदूत के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

