बोधगया (अशोक “अश्क”) ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बोधगया की धरती पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल जनसभा राजनीतिक लिहाज से कई मायनों में खास रही। जहां मंच पर एनडीए के प्रमुख नेता और दिग्गज चेहरे मौजूद थे, वहीं इस सभा में सबसे अधिक ध्यान खींचा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा पार्टी के एक ही परिवार से आने वाले चार प्रतिनिधियों की एक साथ मौजूदगी ने।

प्रधानमंत्री की इस सभा में हम पार्टी के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार में मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन, बाराचट्टी की विधायक ज्योति मांझी और इमामगंज की विधायक दीपा मांझी मंच पर एक साथ नजर आए। एक ही परिवार के चार निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की यह उपस्थिति न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बनी रही, बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में इस पर विशेष ध्यान दिया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दृश्य हम पार्टी की आंतरिक एकजुटता और मांझी परिवार की राजनीति में मजबूत पकड़ को दर्शाता है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी लंबे समय से बिहार की राजनीति का एक अनुभवी और प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। उनके पुत्र डॉ. संतोष सुमन राज्य सरकार में मंत्री हैं और हम पार्टी की कमान भी संभाल रहे हैं। वहीं, मांझी की समधन ज्योति मांझी और बहू दीपा मांझी दोनों क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय और निर्वाचित विधायक हैं, जो पार्टी की ताकत को जमीन पर मजबूत बनाए हुए हैं।
इस जनसभा में हम पार्टी के कार्यकर्ताओं की जबरदस्त भागीदारी भी देखने को मिली। हजारों की संख्या में आए कार्यकर्ता अनुशासित ढंग से उपस्थित रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी। हम पार्टी की ओर से लगाए गए स्वागत द्वार, पोस्टर, बैनर और स्थानीय स्तर पर की गई तैयारियों ने संगठनात्मक क्षमता का भी परिचय दिया।
सभा में मौजूद कुछ एनडीए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मांझी परिवार की इस सामूहिक उपस्थिति को ‘पारिवारिक राजनीतिक शक्ति की मिसाल’ करार दिया, वहीं कुछ ने इसे ‘राजनीतिक संतुलन और रणनीति की कुशलता’ बताया। मंच पर मांझी परिवार की एकजुटता को लेकर चर्चा इस बात पर भी केंद्रित रही कि यह एनडीए में हम पार्टी की भूमिका और भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेतक बन सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल एक मंच साझा करना नहीं था, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों, जातीय समीकरणों और दलित नेतृत्व की भूमिका को पुनः परिभाषित करने की कोशिश भी थी। मांझी परिवार की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि हम पार्टी, खासकर मांझी समाज और दलित वर्ग के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है।
यह भी माना जा रहा है कि इस प्रकार की सार्वजनिक एकजुटता से न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, बल्कि आगामी चुनावों में एनडीए को सामाजिक समीकरण साधने में भी मदद मिलेगी। आने वाले दिनों में इस मंच की तस्वीर और उसके राजनीतिक संदेश को बिहार की सियासत में दूरगामी असर डालने वाला बताया जा रहा है।
बोधगया की इस सभा ने जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को एक बार फिर रेखांकित किया, वहीं हम पार्टी और मांझी परिवार की एकजुटता ने यह साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में ‘परिवारवाद’ अब केवल आलोचना का विषय नहीं, बल्कि रणनीतिक उपयोग का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।

