दरभंगा (अशोक “अश्क”) मिथिलांचल की राजनीति में विशेष स्थान रखने वाला दरभंगा विधानसभा क्षेत्र 2025 के चुनाव में नए सियासी समीकरणों का केंद्र बनता दिख रहा है। कभी सियासी अस्थिरता का पर्याय रहा यह क्षेत्र अब पिछले दो दशकों से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ बना हुआ है। साल 2005 से लगातार पांच बार इस सीट पर भाजपा के संजय सरावगी ने जीत दर्ज की है। लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है—एक ओर राष्ट्रीय जनता दल- कांग्रेस गठबंधन, तो दूसरी ओर जन सुराज पार्टी की आक्रामक सक्रियता।

दरभंगा विधानसभा सीट का गठन 1951 में हुआ था, जब इसे ‘दरभंगा सेंट्रल’ नाम दिया गया था। 1967 के बाद इसका नाम बदलकर दरभंगा कर दिया गया। अब तक यहां 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें से 8 बार भाजपा और जनसंघ, 6 बार कांग्रेस, एक बार सीपीआई, एक बार जनता दल और एक बार राजद ने जीत हासिल की है। 1985 में अशफाक अंसारी कांग्रेस के अंतिम विजेता थे। इसके बाद कांग्रेस यहां से दोबारा वापसी नहीं कर सकी।
2005 से अब तक संजय सरावगी इस सीट से विजयी होते आ रहे हैं और अब वे दरभंगा से पांच बार जीतने वाले पहले विधायक बन चुके हैं। वर्तमान में वे बिहार सरकार में भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री भी हैं। भाजपा उन्हें फिर से मैदान में उतारने की तैयारी में है, लेकिन इस बार मुकाबला ज्यादा कठिन दिख रहा है।
राजद इस सीट पर अब तक उम्मीदवार बदलकर किस्मत आजमाता रहा है, लेकिन संजय सरावगी की पकड़ को कमजोर नहीं कर सका। कांग्रेस भी लंबे समय से हाशिए पर रही, पर इस बार दोनों दल मिलकर भाजपा के खिलाफ एकजुट रणनीति बना रहे हैं। हाल ही में राहुल गांधी ने दरभंगा में जनसभा कर एनडीए सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया और स्थानीय मुद्दों को उभारा।
दूसरी ओर, जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने यहां लंबी पदयात्रा और जनसंवाद कर नई सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश की है। उनकी पार्टी खासकर युवा और नए मतदाताओं को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
विधायक संजय सरावगी ने अपने कार्यकाल के दौरान कई विकास कार्यों की बात कही है। उनके मुताबिक, 1868 करोड़ की लागत से दरभंगा जंक्शन से एकमी तक एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना स्वीकृत हुई है। साथ ही हराही, दिग्घी और गंगासागर तालाबों का एकीकरण, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम, विद्युत शवदाह गृह और अत्याधुनिक तारामंडल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। शहर में ट्रैफिक जाम से निजात के लिए 6 आरओबी भी बनाए जा रहे हैं।
लेकिन विपक्ष इन दावों को खारिज कर रहा है। राजद जिलाध्यक्ष उदय शंकर यादव का आरोप है कि सरावगी ने पिछले पांच सालों में सिर्फ अपना विकास किया है। उनका कहना है कि शहर की सड़कों, नालों और जल निकासी की स्थिति बदतर हो गई है। बारिश में शहर जलजमाव से त्रस्त रहता है, और ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
दरभंगा न सिर्फ राजनीतिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बिहार का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह दरभंगा राज परिवार की ऐतिहासिक भूमि रही है, जिसका शिक्षा, संस्कृति और संगीत में खास योगदान रहा है। यहां दो प्रमुख विश्वविद्यालय, श्यामा मंदिर जैसे धार्मिक स्थल और हाल में शुरू हुआ एयरपोर्ट इसे क्षेत्रीय राजधानी जैसा दर्जा देते हैं।
दरभंगा विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,14,719 मतदाता हैं, जिनमें 1,65,411 पुरुष, 1,49,295 महिला और 13 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। यह सीट चार दिशाओं में दरभंगा ग्रामीण, बहादुरपुर और केवटी विधानसभा क्षेत्रों से घिरी हुई है।
दरभंगा विधानसभा सीट 2025 के चुनाव में भाजपा के लिए एक परीक्षा की घड़ी बन सकती है। जहां एक ओर संजय सरावगी अपने विकास कार्यों के आधार पर मतदाताओं से समर्थन मांगेंगे, वहीं दूसरी ओर विपक्ष उन्हें घेरने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। जलजमाव, ट्रैफिक और अधूरे विकास कार्य इस चुनाव में निर्णायक मुद्दे बन सकते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या दरभंगा की जनता एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताती है या बदलाव का संदेश देती है।

