नई दिल्ली 9 सितंबर (अशोक “अश्क”) 16 अप्रैल 1853 यह तारीख भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आई, जब देश की धरती पर पहली बार रेलगाड़ी दौड़ी। मुंबई के बोरी बंदर स्टेशन (आज का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) से ठाणे के बीच चली इस ट्रेन ने सिर्फ 34 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन इस छोटी-सी यात्रा ने भारतीय रेल परिवहन के एक नए युग की शुरुआत कर दी

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भारत की पहली रेलगाड़ी में 13 डिब्बे और तीन इंजन साहिब, सिंध और सुल्तान लगे हुए थे। इस ऐतिहासिक सफर में करीब 400 खास मेहमान सवार थे। रेलवे की यह शुरुआत केवल एक यातायात व्यवस्था नहीं थी, बल्कि भारत की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति का आधार भी बनी।
भारतीय रेलवे की परिकल्पना 1830 के दशक में शुरू हुई थी। इसका मूल उद्देश्य ब्रिटिश शासन को भारत से कच्चा माल सस्ती और तेज़ी से समुद्री बंदरगाहों तक पहुँचाने में मदद करना था।
1832 में पहली बार भारत में रेलवे के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया। 1845 में दो प्रमुख कंपनियाँ ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे और ईस्ट इंडियन रेलवे कंपनी की स्थापना हुई।
नवंबर 1852 में पहला ट्रायल रन सफल रहा।
और अंततः, 16 अप्रैल 1853 को पहली यात्री ट्रेन सेवा शुरू की गई।
इस ऐतिहासिक प्रयास के पीछे ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौज़ी की बड़ी भूमिका रही। साथ ही भारतीय व्यापारी सर जमशेदजी जीजीभॉय और नाना शंकरशेठ ने इस परियोजना में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
करीब 10,000 मज़दूरों ने इस रेलवे लाइन को बनाने में दिन-रात मेहनत की। इस पर लगभग £10,000 का खर्च आया।
16 अप्रैल 1853 को दोपहर 3:30 बजे, रंग-बिरंगे झंडों, तोपों की सलामी और भीड़ के जोश के बीच पहली ट्रेन बोरी बंदर स्टेशन से रवाना हुई। रास्ते में सायन स्टेशन पर इंजन को पानी और तेल देने के लिए थोड़ी देर के लिए रोका गया। कुल 55 मिनट में यह ट्रेन 34 किलोमीटर की दूरी तय कर ठाणे पहुंच गई।
उस दिन 21 तोपों की सलामी दी गई और सार्वजनिक अवकाश** घोषित किया गया, ताकि लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बन सकें।
ट्रेन की औसत गति 30–35 मील प्रति घंटा थी और उसी शाम को ट्रेन वापस मुंबई लौटा दी गई।
पहली ट्रेन यात्रा में किराए की दरें इस प्रकार थीं:
प्रथम श्रेणी (First Class) ₹2 और 10 आने
द्वितीय श्रेणी (Second Class) ₹1 और 1 आना
तृतीय श्रेणी (Third Class) 5 आने 3 पैसे (लगभग 3 पाई प्रति मील)
उस दौर में यह किराया आम लोगों के लिए अधिक था, लेकिन विशेष अतिथियों को इस पहले सफर के लिए आमंत्रित किया गया था।
1853 में केवल 34 किलोमीटर से शुरू हुआ भारतीय रेलवे नेटवर्क आज दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। यह हर दिन लाखों यात्रियों और हज़ारों टन माल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाता है।
हालाँकि आज हाई-स्पीड ट्रेनें, बुलेट ट्रेन और अत्याधुनिक तकनीकें भारतीय रेलवे का हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन इसकी नींव ‘साहिब’, ‘सिंध’ और ‘सुल्तान’ ने रखी थी। यह वही शुरुआत थी जिसने भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में रेल की भूमिका को स्थायी बना दिया।
16 अप्रैल को हर साल भारतीय रेल परिवहन दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि इस गौरवपूर्ण यात्रा की स्मृति बनी रहे और नई पीढ़ियों को इसकी ऐतिहासिक विरासत की जानकारी मिलती रहे।

