नई दिल्ली, 24 सितंबर (अशोक “अश्क”) भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर वैश्विक स्तर पर लगातार सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका की ओर से लगाए गए 50 फीसदी हाई टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। अब एक और बड़ी वैश्विक संस्था आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने भारत की विकास दर के अनुमान में उल्लेखनीय इजाफा किया है।
OECD ने मंगलवार को जारी अपने अंतरिम आउटलुक में भारत की विकास दर के अनुमान को 6.3% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, यानी सीधे 40 बेसिस पॉइंट का इजाफा किया गया है। यह वृद्धि मोदी सरकार द्वारा किए गए GST सुधारों को ध्यान में रखते हुए की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य वस्तुओं से लेकर इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स, कार-बाइक्स आदि पर टैक्स कटौती के कारण घरेलू मांग में तेजी आई है, जिससे विकास को नई गति मिली है।

हालांकि, OECD ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अनुमान में 20 बीपीएस की कटौती** कर इसे 6.2% कर दिया है, लेकिन चालू वित्त वर्ष में विकास दर का ऊंचा अनुमान यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपने विकास पथ पर मजबूती से टिका हुआ है।
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी S\&P ने भी भारत पर अपना भरोसा जताया है। एजेंसी ने FY26 के लिए भारत की ग्रोथ रेट 6.5% पर बरकरार रखी है, भले ही अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का दबाव बना हुआ है। S\&P का मानना है कि सरकारी नीतियों, टैक्स कटौती और मजबूत घरेलू मांग की बदौलत भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
एजेंसी ने फूड इंफ्लेशन में गिरावट को देखते हुए FY26 के लिए महंगाई दर का अनुमान घटाकर 3.2% कर दिया है। साथ ही रेपो रेट में भी एक और 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना जताई है। बता दें कि RBI पहले ही तीन बार में कुल 100 बेसिस पॉइंट की कटौती कर चुका है, और अगस्त 2025 में रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखा था।
इससे पहले अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch Ratings) भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर आशावादी दिखी थी। फिच ने सितंबर की शुरुआत में अपनी रिपोर्ट में FY26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया था, यानी 40 बेसिस पॉइंट का इजाफा। यह वृद्धि तब की गई जब अमेरिकी टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार पर दबाव बना हुआ है।
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक संस्थाओं का विश्वास जीत रही है। GST सुधार, घरेलू मांग, और मजबूत नीतिगत फैसलों की बदौलत भारत न सिर्फ तेज गति से बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता का उदाहरण भी बन रहा है।

