नई दिल्ली, 6 सितंबर (अशोक “अश्क”) तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी एकी इस महीने प्रस्तावित भारत यात्रा रद्द कर दी गई है। यह फैसला उस समय लिया गया जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ओर से यात्रा प्रतिबंधों से छूट नहीं दी गई। मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि यह यात्रा होती, तो अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद किसी मंत्री की यह पहली भारत यात्रा होती।

तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर भले ही कब्जा कर लिया हो, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने अब तक उनकी सरकार को मान्यता नहीं दी है। इसके चलते तालिबान के कई वरिष्ठ नेताओं पर यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति जब्ती और हथियारों की खरीद-बिक्री जैसे कड़े प्रतिबंध लागू हैं। विदेश यात्रा के लिए उन्हें पहले UNSC से विशेष अनुमति लेनी होती है।
सूत्रों के मुताबिक, मुत्ताकी को यात्रा छूट न मिलने के पीछे पाकिस्तान की भूमिका मानी जा रही है। दरअसल, पाकिस्तान इस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1988 प्रतिबंध समिति का प्रमुख है। यह समिति तालिबान से जुड़े प्रतिबंधों की निगरानी करती है। इस समिति में सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य शामिल होते हैं और किसी एक सदस्य की आपत्ति भी किसी नेता की यात्रा रोक सकती है।
यात्रा रोकने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मुत्ताकी की पाकिस्तान यात्रा प्रस्तावित थी, लेकिन उस समय अमेरिका की आपत्ति के चलते उन्हें यात्रा की छूट नहीं मिल सकी थी और दौरा रद्द करना पड़ा था।
जब इस विषय पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, अफगानिस्तान के लोगों के साथ हमारे लंबे समय से संबंध हैं। भारत अफगान लोगों की आकांक्षाओं और विकास संबंधी जरूरतों का समर्थन करता रहेगा।”
उन्होंने यह भी जोड़ा, “हम अफगान अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। इस बारे में कोई अपडेट होगा, तो हम उसे आपके साथ साझा करेंगे।”
भारत ने भले ही तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन काबुल में भारतीय तकनीकी मिशन काम कर रहा है और मानवीय सहायता जारी है। भारत, अफगानिस्तान में स्कूल, अस्पताल, सड़क और बिजली परियोजनाओं में वर्षों से सहयोग करता आया है।
मुत्ताकी की यात्रा रद्द होने से एक ओर जहां राजनयिक संवाद की संभावनाएं कमजोर हुई हैं, वहीं यह मामला संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक प्रक्रियाओं में पाकिस्तान और अन्य देशों की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजरें इस पर हैं कि क्या भविष्य में तालिबान के किसी वरिष्ठ नेता को भारत आने की अनुमति मिल सकेगी या नहीं।

