बांका 27 अगस्त (अशोक “अश्क”) क्या आपने कभी सुना है कि किसी भूत के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो? नहीं न? लेकिन बिहार के बांका जिले में ऐसा ही अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जहां एक मृत शिक्षक के खिलाफ निगरानी विभाग ने फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर दी है। यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है और शिक्षा विभाग की लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

यह मामला बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय मेहरपुर से जुड़ा है। यहां कार्यरत रहे शिक्षक निरंजन कुमार पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने का आरोप लगाया गया है। निगरानी विभाग की शिकायत पर उनके खिलाफ हाल ही में एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि निरंजन कुमार की मौत 5 साल पहले ही, वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान हो चुकी थी।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने मृत्यु के तत्काल बाद मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधित बीआरसी और जिला शिक्षा कार्यालय में जमा करा दिया था। इसके बावजूद न तो शिक्षा विभाग और न ही निगरानी विभाग को शिक्षक की मृत्यु की जानकारी मिली और मृत व्यक्ति पर ही केस दर्ज कर दिया गया।
मृतक शिक्षक का घर मिर्जापुर पंचायत के सोनडीह गांव में है। शुक्रवार को उनके परिजन शंभूगंज थाना पहुंचे और शिक्षक का मृत्यु प्रमाण पत्र थानाध्यक्ष मंटू कुमार को सौंपा। थानाध्यक्ष ने बताया कि अब मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि निगरानी विभाग ने बिना पूरी जानकारी लिए प्राथमिकी कैसे दर्ज कर दी।
इस लापरवाही से न केवल मृतक शिक्षक के परिजन आहत हैं, बल्कि पूरे प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग, निगरानी टीम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि इस अनोखे ‘भूत प्रकरण’ में क्या कार्रवाई होती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, जिन्होंने एक मृत व्यक्ति को ही आरोपी बना डाला।

