नई दिल्ली, 14 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में एक सर्वे प्रस्तुत किया है। इस सर्वे के अनुसार, 10 हजार शहरी और ग्रामीण परिवारों में से 56% ओबीसी वर्ग के लोगों ने कहा कि जब उच्च जाति के लोग उनके घर से गुजरते हैं तो वे सम्मान स्वरूप खड़े हो जाते हैं। यह सर्वे महू स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा 2023 में किया गया था।

सरकार ने इस सर्वे को ओबीसी आरक्षण 27% तक बढ़ाने का समर्थन करते हुए पेश किया है, जबकि अभी तक राज्य में 14% आरक्षण मिलता है। सर्वे में 3,797 परिवारों ने बताया कि छुआछूत अब भी उनके गांवों में मौजूद है और जाति के आधार पर मोहल्ले बंटे हुए हैं। 3,238 परिवारों ने कहा कि उनके घर ब्राह्मण पूजा-पाठ नहीं करते हैं, जबकि 57% लोगों का कहना है कि उनकी जाति के लोग मंदिरों में पुजारी या मठ प्रमुख नहीं बन पाते। लगभग आधे लोगों ने धार्मिक शिक्षा संस्थानों में प्रवेश न मिलने की बात कही।
सरकार ने अपने हलफनामे में प्राचीन भारत को जातिविहीन बताया और कहा कि वैदिक काल में भेदभाव नहीं था, लेकिन बाद में आर्थिक कमजोर वर्ग यानी ओबीसी पर भेदभाव हुआ। इसके तहत ओबीसी वर्ग को 35% कोटा और महिलाओं को 50% कोटा देने का प्रस्ताव है।

