नई दिल्ली, 30 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) महाराष्ट्र में किसानों का आक्रोश दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। पूर्व मंत्री बच्चू कडू के नेतृत्व में चल रहे ‘महाअल्गार मोर्चा’ ने बुधवार को नागपुर-हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को पूरी तरह जाम कर दिया। इस आंदोलन को एनसीपी (शरद पवार गुट), किसान सभा और राजू शेट्टी की पार्टी का समर्थन मिला है, जिससे यह प्रदर्शन और व्यापक हो गया है।

किसानों की मुख्य मांगें हैं — सम्पूर्ण कर्ज माफी, असमय बारिश से फसलों को हुए नुकसान की तत्काल भरपाई, फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करना और दिव्यांग किसानों को ₹6,000 मासिक भत्ता देना। राजमार्ग पर जाम के चलते यातायात पूरी तरह ठप हो गया और लंबी दूरी के वाहनों की कतारें लग गईं। बच्चू कडू ने राज्य सरकार को नागपुर में वार्ता के लिए अल्टीमेटम देते हुए कहा कि “हम मुंबई नहीं जाएंगे, सरकार को यहां आना होगा।”
लातूर जिले के किसान सुरेश चौहान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसमें वे अपनी बर्बाद सोयाबीन फसल देखकर फूट-फूटकर रोते नजर आए। उन्होंने बताया कि दो दिन की भारी बारिश और बाढ़ से उनकी पूरी फसल नष्ट हो गई है, जबकि अब तक कोई राहत राशि नहीं मिली।
इसी बीच, परभणी में गुस्साए किसानों ने जिला कलेक्टर की कार पर पथराव कर दिया। पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार किसानों की पीड़ा समझती है और अब तक ₹32,000 करोड़ के राहत पैकेज का वितरण शुरू हो चुका है। उन्होंने अपील की कि किसान जनजीवन बाधित न करें और संवाद के माध्यम से समाधान खोजें। फडणवीस ने कहा, “हमारा उद्देश्य बैंकों को नहीं, बल्कि किसानों को वास्तविक सहायता देना है।”
राज्य के 29 जिलों में लगभग 68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें नष्ट हुई हैं। ऐसे में यह संकट आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है।

