
बक्सर, 20 फरवरी (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के परिसर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “कृषि एवं पर्यावरणीय सततता हेतु संसाधन संरक्षण के साथ लचीला मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन” का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।

यह सम्मेलन विश्वविद्यालय तथा Academy of Natural Resource Conservation and Management (एएनआरसीएम), लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया।समापन सत्र का शुभारंभ आयोजन सचिव डॉ. अंशुमान कोहली ने मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते हुए किया।

एएनआरसीएम के अध्यक्ष डॉ. ए. के. सिंह ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लचीला मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन ही भविष्य की खेती की आधारशिला है।एएनआरसीएम के सचिव डॉ. संजय अरोड़ा ने दीर्घकालीन कृषि स्थिरता के लिए संसाधन संरक्षण तकनीकों के व्यापक प्रसार पर जोर दिया। आयोजन सचिव डॉ. कोहली ने सम्मेलन की कार्यवाही प्रस्तुत करते हुए प्रमुख तकनीकी सत्रों, महत्वपूर्ण अनुशंसाओं और उत्कृष्ट शोध पत्रों की सराहना की तथा पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की।

सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. डी. के. शर्मा ने कहा कि शोध निष्कर्षों को खेत स्तर तक पहुंचाना समय की मांग है। मुख्य अतिथि एवं कुलपति प्रो. डॉ. डी. आर. सिंह ने सम्मेलन को सफल बताते हुए कहा कि मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और संसाधन संरक्षण खाद्य सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण की मजबूत नींव हैं।डॉ. बी. पी. मंडल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्मेलन सकारात्मक संकल्पों के साथ संपन्न हुआ।

