
बक्सर, 18 फरवरी (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के प्रांगण में बुधवार को उस समय वैज्ञानिक ऊर्जा का विस्फोट देखने को मिला, जब तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “सुदृढ़ मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से संसाधन संरक्षण आधारित कृषि एवं पर्यावरणीय स्थिरता” का भव्य शुभारंभ हुआ।

18 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन विश्वविद्यालय और Academy of Natural Resource Conservation and Management, लखनऊ द्वारा किया जा रहा है। देशभर से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों की उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना दिया।उद्घाटन सत्र की शुरुआत आयोजन सचिव डॉ. अंशुमान कोहली के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि टिकाऊ मृदा प्रबंधन ही कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय सुरक्षा की असली आधारशिला है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में अकादमी के अध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह ने संसाधन संरक्षण तकनीकों और सहयोगात्मक अनुसंधान को कृषि स्थिरता का मूल मंत्र बताया। इस दौरान विश्वविद्यालय के मीडिया केंद्र ने “सफरनामा” प्रस्तुति के माध्यम से शोध उपलब्धियों और किसानों तक पहुंच रही नवाचार पहलों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।कार्यक्रम में सम्मेलन की सार-संग्रह पुस्तक और स्मारिका का विमोचन भी हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित Bidhan Chandra Krishi Viswavidyalaya के पूर्व प्रति-कुलपति डॉ. बिस्वपति मंडल ने कृषि तंत्र में “लचीलापन” को समय की मांग बताया।

विशिष्ट अतिथि ICAR-Central Soil Salinity Research Institute के पूर्व निदेशक डॉ. डी.के. शर्मा ने मृदा लवणता प्रबंधन और पुनर्वास को सतत कृषि का आधार बताया।सम्मेलन का मुख्य व्याख्यान ऑनलाइन माध्यम से International Crops Research Institute for the Semi-Arid Tropics के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने दिया। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य को जलवायु-स्मार्ट कृषि और कार्बन अवशोषण से जोड़ते हुए वैश्विक चुनौतियों के समाधान की दिशा सुझाई।विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने वैज्ञानिक अनुसंधान और किसान हितैषी तकनीकों के समन्वय पर बल दिया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ उद्घाटन सत्र संपन्न हुआ। आगामी दो दिनों में तकनीकी सत्रों में मृदा स्वास्थ्य की रणनीतियों पर मंथन होगा, जिससे कृषि और पर्यावरणीय स्थिरता को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

