पटना, 06 नवम्बर (पटना डेस्क) बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान के बाद मोकामा विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। मतदान के तुरंत बाद यहां की सियासत में तेजी से हलचल देखने को मिल रही है। बाहुबली नेताओं का घटता प्रभाव, जातीय समीकरणों का पुनर्संयोजन और मतदाताओं की बदलती प्राथमिकताएं इस बार के चुनावी माहौल को और जटिल बना रही हैं।

मोकामा सीट हमेशा से राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मानी जाती रही है। यहां मतदाता न केवल विकास और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वोट दे रहे हैं, बल्कि जातीय पहचान और उम्मीदवारों की छवि भी निर्णायक भूमिका निभा रही है। मतदान के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं बता रही हैं कि इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित हो सकता है।
अनंत सिंह के समर्थक अब भी अपनी पकड़ मजबूत मानते हैं, जबकि जनसुराज पार्टी और जेडीयू-आरजेडी गठबंधन अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। हाल ही में जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने सुरक्षा बढ़ाने और अतिरिक्त फोर्स की तैनाती के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार मोकामा में “डर और उम्मीद” दोनों साथ मौजूद हैं—जहां कुछ लोग बदलाव की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं पुराने समीकरणों की वापसी के संकेत भी मिल रहे हैं।

