
समस्तीपुर, 20 फरवरी (समस्तीपुर डेस्क) जिले में पाक महीने रमजान की आमद के साथ ही मस्जिदों से गूंजती अजान और दुआओं में उठते हाथों ने फिजा को रूहानी रंग में रंग दिया है। वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र के मथुरापुर निवासी युवा समाजसेवी जमशेद आदिल सोनू ने कहा कि रमजान इंसान को हर बुराई से दूर कर अल्लाह के करीब पहुंचने का सुनहरा मौका देता है।

उन्होंने बताया कि भागदौड़ और खुदगर्जी भरी जिंदगी में रमजान आत्ममंथन का महीना है, जहां रोजेदार भूख-प्यास के साथ झूठ, चुगली, बुरी नजर और तमाम बुराइयों पर काबू पाने की कठिन साधना करता है। इसी सब्र और परहेजगारी से बंदा खुदा की रहमतों का हकदार बनता है।

इस्लाम की पांच बुनियादों में शामिल रोजा के लिए रमजान मुक़र्रर किया गया है। आम तौर पर 30 दिनों के इस महीने को तीन अशरों में बांटा गया है—पहला ‘रहमत’, दूसरा ‘बरकत’ और तीसरा ‘मगफिरत’। माना जाता है कि इन दिनों में अल्लाह अपने बंदों पर खास इनायत फरमाता है और गुनाहों से पाक होने का मौका देता है।

