
पटना, 17 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। वोटिंग से गैरहाजिर रहे तीन कांग्रेस और एक राजद विधायक की अनुपस्थिति ने नतीजों पर सीधा असर डाला, जिससे एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने में सफल रही।अब एक दिन बाद गैरहाजिर विधायकों की सफाई सामने आई है। वाल्मीकिनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने महागठबंधन के उम्मीदवार को लेकर असंतोष जताया।

उनके प्रतिनिधि ने बताया कि वे किसी दूसरे चेहरे के पक्ष में थे, लेकिन राय नहीं मानी गई, इसी वजह से उन्होंने मतदान से दूरी बनाई।वहीं मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि दलित, अल्पसंख्यक और ओबीसी वर्ग की अनदेखी की गई। उन्होंने इसे विरोध का तरीका बताते हुए वोटिंग का बहिष्कार किया। फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है, लेकिन उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है।

इधर राजद विधायक फैसल रहमान ने निजी कारण बताते हुए कहा कि वे अपनी बीमार मां के इलाज के चलते दिल्ली में थे, इसलिए मतदान में शामिल नहीं हो सके।हालांकि सभी विधायकों ने एक सुर में साफ किया कि वे कांग्रेस के साथ थे, हैं और आगे भी रहेंगे।इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने महागठबंधन में अंदरूनी मतभेद और रणनीतिक कमजोरी को उजागर कर दिया है, जिससे आने वाले समय में सियासी समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं।

