राहत-सह-बचत योजनांतर्गत लम्बित राशि का अविलम्ब भुगतान करे सरकार: कश्यप, राज्य के 38 लाख मछुआरों को राहत-सह-बचत योजना का लाभ पहुंचाए सरकार।

पटना, 14 सितम्बर (राजेश झा) बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक श्री ऋषिकेश कश्यप ने मीन भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कॉफ्फेड के मांग पर केन्द्र सरकार ने बिहार सरकार को राज्य में राहत-सह-बचत योजना लागू करने का निर्देश वर्ष 2018 में दिया। राज्य सरकार के द्वारा इसे पहली बार वर्ष 2021-22 में राज्य के 50 हजार मछुआरों के लिए लागू किया गया। इस योजना के तहत 15 करोड़ रूपये जिसमें 7.50 करोड़ केंद्र का हिस्सा एवं 7.50 करोड़ राज्य सरकार का हिस्सा था। वर्ष 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 में बिहार के मछूआरों को एक भी रूपये का भुगतान नहीं किया गया। बिहार जैसे अंतर्देशीय राज्य में मानसून और बाढ़ के दौरान आय पूरी तरह बंद हो जाती है। फिर भी, बिहार के मछुआरों को लगातार 3 साल से वंचित रखा गया है, जिससे राज्य के परंपरागत मछुआरों में वर्तमान राज्य सरकार के विरूद्ध आक्रोश व्याप्त है।


बिहार राज्य में मत्स्यपालन की आपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र सरकार में 31 मई 2019 को मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय का स्वंतत्र गठन करतें हुए बिहार से आने वाले श्री गिरिराज सिंह को पहला मंत्री बनाया जिनका कार्यकाल 7 जुलाई 2021 तक एवं श्री ललन सिंह को दूसरा मंत्री जिनका कार्यकाल 10 जून 2024 से अब तक है। इसके बाबजूद बिहार के परंपरागत मछुआरों के साथ अन्याय हो रहा है।
श्री कश्यप ने आगे बताया कि राहत-सह-बचत योजनांतर्गत आन्ध्र प्रदेश राज्य सरकार के द्वारा प्रतिबंधित अवधि में मछली शिकारमाही पर रोक के विरूद्ध मछुआरों को प्रति परिवार 20 हजार रूपय सहायता देने का प्रावधान है। पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के द्वारा समुद्र साथी योजना के अंतर्गत दो माह शिकारमाही पर रोक के विरूद्ध 5 हजार रूपये प्रतिमाह की दर से कुल 10 हजार रूपये प्रति परिवार देने की योजना है। ओड़िसा राज्य सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री मत्स्यजीवी कल्याण योजना के अंतर्गत शिकारमाही पर रोक के विरूद्ध 7 हजार 500 रूपये प्रति माह की दर से कुल 15 हजार रूपये प्रति परिवार देने की योजना है। वहीं बिहार राज्य में मात्र 4 हजार 500 रूपये प्रति परिवार देने की योजना है।
राज्य सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री श्रीमती रेणु देवी के द्वारा प्रस्ताव न भेजने एवं बजट हिस्सेदारी न देने से राज्य के मछुआरे इस योजना के वंचित है। उनका यह रवैय्या परंपरागत मछुआरा विरोधी है। आन्ध्र प्रदेश राज्य के तर्ज पर राहत-सह-बचत योजनांतर्गत प्रत्येक परिवार को 20 हजार रूपये देने की योजना को लागू करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मागं की है।
मालूम हो कि राहत-सह-बचत योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख कल्याणकारी योजना है। जिसका उद्देश्य मछुआरों को लीन पीरियड/फिशिंग बैन अवधि में वित्तीय सहायता देना। जिसका लाभ 1,500 प्रति माह 3 माह कुल 4,500 प्रति लाभार्थी है। फंडिंग पैटर्न सामान्य राज्यों में 50 प्रतिशत केन्द्र एवं 50 प्रतिशत राज्य का है एवं पूर्वाेत्तर राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में 80 प्रतिशत केन्द्र एवं 20 प्रतिशत राज्य का है। बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम 2006 की धारा- 13 की उपधारा-1 के अनुसार माह जून से अगस्त तक नदियों-गंगा, गंडक, सोन, कोसी, बागमती में शिकारमाही प्रतिषेध होने के कारण नदियों में प्रजनक मछलियों को प्रजनन का अवसर मिलता है जिससे नदियों में मत्स्य बीज का स्वतः संचयन होता है। साथ ही, छोटी मछलियों को बडा होने का समय मिलता है, इससे नदियों में मछली का उत्पादन एवं उत्पादकता में बढ़ोŸारी होती है। जीविकोपार्जन हेतु पूर्ण रूप से आश्रित मछुआरे इस योजना से लाभांवित होते है। बाढ़ के समय मछुआरों को आर्थिक राहत प्राप्त होती है।
देश के अन्य राज्यों में वर्ष 2018-23 तक केरल राज्य में 8 लाख 79 हजार 6 सौ 63 लाभार्थी को 408.20 करोड़, तमिलनाडु में 8 लाख 35 हजार 1 सौ 12 लाभार्थी को 387.40 करोड, आंध्र प्रदेश में 4 लाख 91 हजार 5 सौ 36 लाभार्थी को 217.80 करोड रूपये का लाभ प्राप्त हुआ। इस योजना में बिहार की स्थिति बेहद असमान और अन्यायपूर्ण है। क्यूकि बिहार में मात्र 50 हजार मछुआरों को ही 15 करोड़ रूपये का लाभ प्राप्त हुआ।
श्री कश्यप ने माननीय प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए बिहार में राहत-सह-बचत योजना को तुरंत पुनः लागू करने, पिछले तीन वर्षों का लंबित भुगतान (2022-25) मछुआरों को देने, जिलावार लक्ष्य निर्धारित कर सभी जिलों के 1-1 लाख पंजीकृत परंपरागत मछुआरों को योजनांतर्गत कवर करने, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बिहार को न्यूनतम 38 लाख वार्षिक लाभार्थी का लक्ष्य देने, डीबीटी/पीएफएमएस के जरिए सीधे खाते में भुगतान करने एवं अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र को समुद्री राज्यों के समान अधिकार देने की मांग की है।
“बिहार के मछुआरे देश की मत्स्य अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। लेकिन लगातार तीन वर्षों से राहत-सह-बचत योजना से वंचित होना गंभीर अन्याय है।”
इस संवाददाता सम्मेलन में श्री मदन कुमार, निदेशक, श्री राकेश कुमार, प्रमण्डल संयोजक, श्री नीरज कुमार, श्री मनोज कुमार, श्री सतिश कुमार, गोपी कुमार, प्रमोद कुमार, मोनू कुमार आदि उपस्थित थे।

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