नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज भारत की रक्षा शक्ति का नया केंद्र बन गई, जब यहां स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूनिट से सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यूनिट दिसंबर 2021 में शुरू हुई थी और 11 मई 2025 को इसका औपचारिक उद्घाटन हुआ था। मात्र पांच महीनों में उत्पादन शुरू कर, यह यूनिट भारतीय रक्षा उद्योग की गति और क्षमता का प्रतीक बन चुकी है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को चेताते हुए कहा, “ऑपरेशन सिंदूर तो सिर्फ ट्रेलर था, पाकिस्तान की पूरी ज़मीन ब्रह्मोस की रेंज में है।” उन्होंने ब्रह्मोस को भारत की स्वदेशी सैन्य ताकत का प्रतीक बताया और कहा कि यह मिसाइल थलसेना, वायुसेना और नौसेना—तीनों की रीढ़ बन चुकी है।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस यूनिट से हर साल 80 से 100 मिसाइलों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। यह यूनिट यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड्स में से एक है और इसके जरिए राज्य को अब तक 40 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व मिल चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास की मिसाल बताते हुए कहा, “लखनऊ अब सिर्फ तहज़ीब नहीं, टेक्नोलॉजी का भी शहर बन चुका है।”
ब्रह्मोस मिसाइल की खासियतें:
- ध्वनि की गति से 2.8 से 3 गुना तेज (Mach 2.8–3)
- ज़मीन, हवा और पानी—तीनों माध्यमों से लॉन्च योग्य
- “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक आधारित
- मारक क्षमता: 290 से 800 किमी
- पारंपरिक या न्यूक्लियर वारहेड ले जाने में सक्षम
- दुश्मन के रडार से बच निकलने वाली स्टेल्थ तकनीक
- Su-30 MKI से लॉन्च संभव
ब्रह्मोस की पहली खेप का लखनऊ से रवाना होना भारत की आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक शक्ति और औद्योगिक प्रगति का प्रतीक बन गया है, जिससे भारत न केवल अपनी सुरक्षा जरूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि मित्र देशों को भी सामरिक समर्थन दे सकेगा।

