
पटना, 24 जनवरी (पटना डेस्क) आम जनता के जमीन से जुड़े कार्यों में लापरवाही अब अंचलाधिकारियों को भारी पड़ सकती है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार के 58 अंचलाधिकारियों (सीओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।

संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है, जिसमें प्रपत्र ‘क’ गठन, वेतन वृद्धि पर रोक और पदोन्नति रोकने तक का प्रावधान शामिल है।विभागीय समीक्षा में सामने आया कि कई अंचलों में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) मामलों का निबटारा तय समय 90 दिनों में नहीं हो रहा है, जबकि राज्यस्तरीय औसत 44 दिन है। बड़ी संख्या में आवेदन या तो लंबित रखे गए हैं या अवैध कारणों से खारिज किए गए हैं। इस आधार पर बारसोई, पूर्णिया ईस्ट, उदाकिशुनगंज, आरा, रानीगंज, शाहपुर, फारबिसगंज, गोरौल और दीदारगंज समेत कई अंचलों के सीओ से जवाब-तलब किया गया है।इतना ही नहीं, विभागीय समीक्षा बैठकों से बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर भी सख्ती बरती गई है। हालिया बैठक में आठ अंचलाधिकारी अनुपस्थित पाए गए, जबकि कई डीसीएलआर और अपर समाहर्ता भी बिना पूर्व सूचना के नहीं पहुंचे। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए उनसे भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

अभियान बसेरा के तहत भूमिहीनों को जमीन आवंटन में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। पटना सिटी और जगदीशपुर में 98 प्रतिशत आवेदन ‘नॉट फिट फॉर अलॉटमेंट’ बताकर रद्द कर दिए गए। इसके अलावा सरकारी भूमि सत्यापन, जमाबंदी परिमार्जन और जमीन मापी में लापरवाही पर भी कई सीओ को नोटिस भेजा गया है। विभाग ने साफ संकेत दिया है कि अब जमीन मामलों में सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

