नई दिल्ली, 17 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को आज एक बड़ी सफलता मिली, जब 208 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। इनमें 98 पुरुष और 110 महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने कुल 153 हथियारों के साथ पुलिस और सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

इस ऐतिहासिक सरेंडर में सबसे बड़ी भागीदारी दंतेवाड़ा जिले की रही, जहां लोन वर्राटू अभियान के तहत एक साथ 71 नक्सलियों ने हथियार डाले। सरेंडर करने वालों में 30 इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर ₹64 लाख का इनाम घोषित था। इन सभी ने जिले के एसपी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया।
सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और पुनर्वास की नीति तथा लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों का यह असर है कि अब माओवादी तेजी से कमजोर पड़ रहे हैं। बीते महीनों में कई बड़े नक्सली कमांडर मुठभेड़ों में मारे गए हैं, जिससे संगठन की कमर टूटती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सली अब यह समझने लगे हैं कि हिंसा का रास्ता उन्हें सिर्फ विनाश की ओर ले जाता है। कई बार नक्सलियों ने सरकार से वार्ता की अपील भी की, लेकिन ठोस पहल न होने के कारण अब वे स्वयं मुख्यधारा में लौटने का रास्ता अपना रहे हैं।
आज का आत्मसमर्पण न सिर्फ सुरक्षाबलों के लिए बड़ी जीत है, बल्कि यह संकेत भी है कि छत्तीसगढ़ अब “लाल आतंक” से मुक्ति की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है।

