
बिहार की राजनीति में बुधवार को महिला उद्यमिता के मुद्दे पर माहौल गरमा गया, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। मामला मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना के तहत कथित रूप से लंबित दो लाख रुपये की बकाया राशि के भुगतान से जुड़ा है। राजद नेताओं का आरोप है कि बड़ी संख्या में लाभार्थी महिलाएं अब तक अपनी स्वीकृत राशि का इंतजार कर रही हैं।विधानसभा परिसर में हाथों में तख्तियां और बैनर लिए राजद विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का वादा किया था, लेकिन अब उसी वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। उनका दावा है कि योजना के तहत स्वीकृत लाभार्थियों को समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा, जिससे कई महिलाएं आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं।प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान करना है। लेकिन भुगतान में देरी से योजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि सभी पात्र महिलाओं को दो लाख रुपये की बकाया राशि अविलंब जारी की जाए और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा कराई जाए।राजद विधायकों ने सरकार पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो सदन के भीतर और बाहर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक मामला नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और भरोसे से जुड़ा प्रश्न है।वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक करार दिया गया है। सरकार का कहना है कि योजना के तहत भुगतान निर्धारित नियमों और पात्रता सत्यापन प्रक्रिया के बाद ही जारी किया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन आवेदनों की जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से राशि दी जा रही है।इस मुद्दे को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए क्या कदम उठाती है और विपक्ष अपने आंदोलन को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।

