नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वार्षिक बैठक में कहा कि भारत ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद 8% से अधिक की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर हासिल की है। उन्होंने इसे घरेलू मांग आधारित अर्थव्यवस्था का नतीजा बताया और कहा कि अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद जैसी घटनाओं का भारत पर सीमित प्रभाव पड़ा है।

मल्होत्रा ने बताया कि भारत ने मुद्रास्फीति को 8% से घटाकर 1.5% तक लाने में उल्लेखनीय सफलता पाई है, जो पिछले आठ वर्षों में सबसे निचला स्तर है। तेल की कीमतों में आई गिरावट और नीतिगत उपायों ने इस लक्ष्य को पाने में मदद की है।
RBI गवर्नर ने बताया कि भारत का राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है और केंद्र सरकार का घाटा जीडीपी का 4.4% रहने का अनुमान है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का कुल सार्वजनिक कर्ज वैश्विक स्तर पर सबसे कम देशों में शामिल है।
मल्होत्रा ने कहा, “सरकार और वित्तीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय ने इन उपलब्धियों को संभव बनाया है।”
उन्होंने अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये की स्थिरता की प्रशंसा की। जहां डॉलर में 10% तक गिरावट देखी गई, वहीं रुपये ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता रुपये की व्यवस्थित गतिशीलता बनाए रखना है।
RBI गवर्नर ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के पूंजी बाजार मजबूत और गहरे हैं, जो आर्थिक स्थिरता को और मज़बूती देते हैं।
भारत की यह आर्थिक मजबूती और नीतिगत स्पष्टता उसे वैश्विक मंच पर उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बनाती है खासतौर पर ऐसे समय में जब कई बड़े देश मंदी और अस्थिरता से जूझ रहे हैं।

