कोलकाता, 24 नवम्बर (कोलकाता डेस्क) पश्चिम बंगाल में चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। बीएलओ एसोसिएशन का कहना है कि कई आवेदक ऐसे दस्तावेज़ जमा कर रहे हैं, जिनसे वे अंजान व्यक्तियों को अपना पिता या रिश्तेदार बताकर फर्जी तरीके से मतदाता सूची में शामिल हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि एक ही व्यक्ति के नाम को 10 तक लोगों का पिता दिखाया जा रहा है, जिससे पहचान सत्यापन पर गहरा सवाल खड़ा हो गया है।

संगठन ने इस संदर्भ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को विस्तृत पत्र भेजकर बताया कि विशेषकर बॉर्डर ज़िलों में यह गड़बड़ी बढ़ती जा रही है। बिना किसी वैध संबंध के, सिर्फ समान सरनेम या पुराने रिकॉर्ड नंबर के आधार पर फर्जी लिंकिंग कराई जा रही है। बीएलओ एक्या मंच के महासचिव स्वपन मंडल के अनुसार, आयोग ने मामले की एआई आधारित जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन असली समस्या सिस्टम से अधिक ज़मीनी स्तर पर डराने-धमकाने की है। कई बीएलओ धमकियों के कारण शिकायत दर्ज करने से भी हिचक रहे हैं।
पत्र में ऐप से एडिट विकल्प हटने, सर्वर की धीमी रफ्तार, भ्रमित करने वाले निर्देश और डिजिटाइजेशन की दिक्कतों का भी ज़िक्र है। संगठन ने मृत और बीमार बीएलओ के लिए मुआवज़े की मांग करते हुए चेताया है कि अगर फर्जी लिंकिंग नहीं रोकी गई तो चुनावी पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।

