नई दिल्ली, 22 सितम्बर (अशोक “अश्क”) शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व हर वर्ष अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नौ दिनों तक चलता है। इस दौरान शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितम्बर से हो रही है, और विजयदशमी 2 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें’, जिनमें साधक मां दुर्गा की उपासना कर अपने जीवन से नकारात्मक शक्तियों का अंत करने का संकल्प लेते हैं। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी लोक पर निवास करती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
- शैलपुत्री – नवरात्रि के पहले दिन पूजी जाने वाली मां शैलपुत्री, हिमालय राज की पुत्री हैं। इन्हें प्रकृति का स्वरूप माना जाता है। इनका वाहन वृषभ (बैल) है और इनके हाथ में त्रिशूल और कमल होता है।
- ब्रह्मचारिणी – दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। ये ज्ञान और तप की प्रतीक हैं। इनकी उपासना से साधक को संयम और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
- चंद्रघंटा – तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र का घंटा होता है, जो इन्हें युद्ध की देवी बनाता है। यह स्वरूप साहस और शौर्य का प्रतीक है।
- कूष्मांड – चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। इन्हें ब्रह्मांड की रचयिता माना जाता है। इनकी उपासना से स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- स्कंदमाता – पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। ये भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इनका वाहन सिंह है और ये भक्तों को मोक्ष का मार्ग दिखाती हैं।
- कात्यायनी – छठे दिन मां कात्यायनी की उपासना की जाती है। यह स्वरूप राक्षसों का संहार करने वाली देवी का है। इन्हें विवाह की बाधाएं दूर करने वाली देवी भी माना जाता है।
- कालरात्रि – सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। इनका स्वरूप अत्यंत उग्र है, परंतु यह भक्तों के सारे भय दूर कर उन्हें सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- महागौरी – आठवें दिन मां महागौरी की आराधना की जाती है। इनका रंग गौरवर्ण है और ये शांति, करुणा व सौंदर्य की देवी हैं।
- सिद्धिदात्री – नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। ये समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी हैं। देवी के इस रूप की आराधना से जीवन में सफलता और आत्मिक शांति मिलती है।
शारदीय नवरात्रि न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और शक्ति के जागरण का उत्सव भी है। इन नौ दिनों में देशभर में दुर्गा पूजा, गरबा, कन्या पूजन जैसे अनुष्ठान बड़े धूमधाम से आयोजित किए जाते हैं।

