नई दिल्ली, 3 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) वरुण धवन और जाह्नवी कपूर की फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी सिनेमा घरों में रिलीज हो गई है फिल्म के निर्देशक शशांक खेतान हैं, ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ रंग-बिरंगे सेट्स, चमकदार कॉस्ट्यूम्स और संगीत से सजी एक ऐसी फिल्म है, जो आंखों को भले ही भाए, लेकिन दिल को छूने में नाकाम रहती है।

फिल्म की कहानी दो ठुकराए हुए प्रेमियों, सनी (वरुण धवन) और तुलसी (जान्हवी कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने-अपने एक्स की शादी तोड़ने के लिए मिलकर एक नकली रोमांस का खेल खेलते हैं।
हालांकि इस ‘फेक लव’ प्लान में कब असली इमोशन शामिल हो जाते हैं, पता ही नहीं चलता। समस्या ये है कि ये सब कुछ पहले भी कई बार देखा जा चुका है। कहानी में नयापन नहीं है, स्क्रीनप्ले दोहराव से भरा है और किरदारों में गहराई की कमी साफ दिखती है। वरुण धवन और जान्हवी कपूर अपने-अपने स्टाइल में ठीक-ठाक हैं, लेकिन कुछ नया देने में असफल रहते हैं।
सान्या मल्होत्रा और रोहित सराफ की जोड़ी प्रभावी हो सकती थी, अगर उन्हें पर्याप्त स्क्रीन टाइम मिलता। मनीष पॉल कुछ हास्य पल जरूर देते हैं, पर उनका अंदाज भी पुराना लगता है। फिल्म का संगीत सुनने में अच्छा है, खासकर ‘पनवाड़ी’ और ‘बिजुरिया’, लेकिन वे भी कहानी को नहीं बचा पाते।
फिल्म सामाजिक मुद्दों जैसे माता-पिता का दबाव और महिलाओं की स्वतंत्रता को छूती तो है, लेकिन बहुत सतही ढंग से।
‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ एक बार देखी जा सकने वाली हल्की-फुल्की फिल्म है, जो सिर्फ अपने लुक और संगीत से थोड़ी देर तक बांधे रखती है। लेकिन अगर आप गहराई, नई कहानी या यादगार किरदारों की तलाश में हैं, तो यह फिल्म निराश कर सकती है। फिल्म के रेटिंग की बात करें तो फिल्म को 2.5 स्टार्स मिलने चाहिए।
~ अशोक “अश्क”

