बक्सर, 29 नवम्बर (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) में रबी 2025-26 की 30वीं अनुसंधान परिषद् बैठक (RCM) का भव्य शुभारंभ आज कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह की अध्यक्षता में हुआ। उद्घाटन सत्र में राष्ट्र स्तर के प्रख्यात वैज्ञानिक, डॉ. राम भजन सिंह (पंतनगर), डॉ. वाई.एस. शिवाय (आईसीएआर–आईएआरआई, नई दिल्ली) एवं राज्य के तीन कृषि-जलवायु क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहीं प्रगतिशील महिला कृषक श्रीमती सीमा सिन्हा, रिंकू देवी और अन्नू कुमारी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

पूरे सभागार में शोध, नवाचार और कृषि की नई संभावनाओं पर गहन मंथन का माहौल रहा।निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय ने अब तक 48 उन्नत फसल प्रजातियाँ विकसित की हैं। 5 उत्पादों को GI टैग तथा 30 उत्पाद प्रक्रियाधीन हैं। 31 पेटेंट, 20 कॉपीराइट, 1 ट्रेडमार्क और 174 स्टार्ट-अप्स को SABAGRI के माध्यम से प्रशिक्षण ये उपलब्धियाँ विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान दिला रही हैं।

श्रीमती सीमा सिन्हा ने जूट खेती में 15 वर्षों की प्रगति साझा की, जबकि श्रीमती अन्नू कुमारी ने औषधीय पौधों की खेती में ARI पटना के सहयोग की चर्चा की। श्रीमती रिंकू देवी ने सब्जी उत्पादन में नवाचारों की जानकारी दी।डॉ. राम भजन सिंह ने महिला किसानों की भागीदारी को प्रेरणादायक बताया और कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहा है। वहीं डॉ. वाई.एस. शिवाय ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत शोध, शिक्षा और कृषि इनक्यूबेशन के महत्व पर प्रकाश डाला तथा GRM, NRM और SRM की भूमिका पर जोर दिया।मंच से विश्वविद्यालय की 8 प्रकाशन पुस्तकों का अनावरण भी किया गया, जिसमें GI आधारित कविता “हाँ मैं बिहार हूँ, GI का हकदार हूँ” विशेष आकर्षण रही।डॉ. डी.आर. सिंह ने NABL लैब को भविष्य में रेफरल लैब के रूप में विकसित करने, “लागत कम, उत्पादन ज्यादा” विषय पर लोगो प्रतियोगिता आयोजित करने तथा ज़ोन-आधारित तकनीकों के विकास का आह्वान किया। उन्होंने जैविक खेती, डिजिटल सॉयल मैपिंग और मखाना विकास बोर्ड के शोध को नई दिशा देने की घोषणा की।पहले दिन विभिन्न ज़ोनों सहरसा, सबौर और पटना की विस्तृत प्रस्तुतियाँ हुईं। इसके अलावा दर्जनों महाविद्यालयों और अनुसंधान केन्द्रों ने भी अपनी प्रगति रिपोर्ट रखी। दोपहर सत्र में कृषि के विभिन्न विषयों पर तकनीकी चर्चाएँ जारी रहीं, जो कल भी पूरे जोर-शोर से चलेंगी।

