नई दिल्ली, 3 नवंबर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें राजनीतिक दलों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट के होम पेज पर अपने ज्ञापन, नियम और विनियम प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग, विधि मंत्रालय और विधि आयोग से जवाब मांगा है। यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से पहले से लंबित एक जनहित याचिका में दायर की गई थी।

याचिका में राजनीतिक दलों के पंजीकरण और विनियमन के लिए नियम बनाने और उनके कामकाज में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। आवेदन में चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई कि वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29बी और 29सी का अनुपालन सुनिश्चित करें और उसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि राजनीतिक दल वैधानिक दर्जे के तहत संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं और उम्मीदवारों को टिकट देने तथा चुनाव चिन्ह पर वोट हासिल करने के लिए जनता के सामने जिम्मेदार हैं। आवेदन में यह भी कहा गया कि राजनीतिक दल लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं और एक सार्वजनिक प्राधिकरण की तरह कार्य करते हैं, इसलिए उनका कामकाज जनता के प्रति पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए।
इससे पहले, 12 सितंबर को शीर्ष अदालत ने उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। याचिका में आरोप लगाया गया कि “फर्जी राजनीतिक दल” लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। इनमें खूंखार अपराधी, अपहरणकर्ता, ड्रग तस्कर और मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले शामिल हैं, जो भारी मात्रा में पैसा लेकर राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पदाधिकारी नियुक्त कर रहे हैं, जिससे देश की छवि भी प्रभावित हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम राजनीतिक दलों की पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

