बक्सर, 05 दिसम्बर (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में गुरुवार को विश्व मृदा दिवस उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ शहर” को केंद्र में रखते हुए मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग ने दिन भर कई अभिनव गतिविधियों का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, किसानों तथा आम लोगों में मिट्टी के महत्व और संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना था।सुबह प्रभात फेरी के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने स्वस्थ मिट्टी के प्रति जनसंदेश दिया। इसके बाद विभाग द्वारा तैयार दीवार पत्रिका और मृदा संरक्षण आधारित मॉडल का उद्घाटन हुआ।

साथ ही मृदा स्वास्थ्य पर केंद्रित एक समाचार पत्र भी जारी किया गया।विशेष व्याख्यान में डॉ. ए. के. झा ने “मृदा: एक संक्षिप्त परिचय” विषय पर विस्तृत चर्चा की। व्याख्यान में मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों की अहमियत, कृषि उत्पादन में इसकी भूमिका तथा शहरी क्षेत्रों में क्षरण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया।छात्रों के लिए क्विज़ प्रतियोगिता और पोस्टर प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने मिट्टी संरक्षण और नमूनों के अवलोकन में विशेष रुचि दर्शाई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, शोधार्थी तथा कर्मचारी पूरे दिवस सक्रिय रहे।कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही सतत कृषि और स्वस्थ समाज की आधारशिला है, तथा इस पहल को महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम की सफलता ने यह संदेश दिया कि मृदा संरक्षण केवल वैज्ञानिक विषय नहीं बल्कि सामुदायिक जिम्मेदारी भी है। ऐसे आयोजन युवाओं में पर्यावरण चेतना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं, और विश्वविद्यालय की यह पहल भविष्य की पीढ़ियों को सतत कृषि के प्रति प्रेरित करेगी।

