
पटना, 23 दिसम्बर (पटना डेस्क) बिहार में जारी राजनीतिक तनाव और हिजाब विवाद के बीच नीतीश कुमार सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर एक अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने किशनगंज और दरभंगा जिले में नवनिर्मित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा और छात्रावास की सुविधा देने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकार इसे सरकार की ओर से बड़ा “डैमेज कंट्रोल” और अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने की कोशिश बता रहे हैं।

बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने किशनगंज और दरभंगा में बने अत्याधुनिक आवासीय विद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन स्कूलों का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के मेधावी छात्रों को एक ही परिसर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। खास बात यह है कि योजना का लाभ सिर्फ मुस्लिम छात्र ही नहीं, बल्कि सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के छात्र भी उठा सकेंगे।सरकार की इस योजना के तहत छात्रों की पढ़ाई, रहने और खाने का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। पात्र और इच्छुक अभ्यर्थी 30 दिसंबर 2025 तक आवेदन कर सकते हैं। विभाग का दावा है कि यह पहल अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है।हालांकि विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

विपक्षी दलों का आरोप है कि वक्फ से जुड़े फैसलों, हालिया हिजाब विवाद और अन्य सांप्रदायिक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए मुख्यमंत्री ने यह सियासी कार्ड खेला है। उनका कहना है कि एक ओर प्रशासन नियमों को लेकर सख्ती दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घोषणाओं से सकारात्मक संदेश देने की कोशिश हो रही है।वहीं सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह फैसला किसी विवाद से जुड़ा नहीं, बल्कि “न्याय के साथ विकास” की नीति का हिस्सा है और अल्पसंख्यक छात्रों का सशक्तिकरण ही इसकी प्राथमिकता है।

