बक्सर, 10 दिसम्बर (विक्रांत) स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अनेक वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर आज़ादी की नींव रखी, उन्हीं में से एक थे अमर शहीद भगवती प्रसाद बारी, जिनका अदम्य साहस आज भी देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करता है। प्रयागराज के बादशाही मंडी में जन्मे इस युवा क्रांतिकारी में राष्ट्रप्रेम बचपन से ही कूट-कूटकर भरा था।

पढ़ाई के साथ-साथ वे समाज और देश के लिए निरंतर सक्रिय रहे।महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1942 में शुरू हुए करो या मरो। आंदोलन के दौरान 13 अगस्त की रात भगवती प्रसाद बारी अपने साथी के साथ हीवेट रोड पहुँचे। अंग्रेजी शासन की संचार व्यवस्था ठप करने के लिए वे टेलीफोन तार काट रहे थे, तभी ब्रिटिश सेना ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। मात्र 24 वर्ष की उम्र में यह वीर सपूत वहीं शहीद हो गया, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हुआ।उनका बलिदान केवल एक घटना नहीं, बल्कि उस अग्निशिखा का प्रतीक है जिसने अंग्रेजी सत्ता की जड़ें हिला दीं। आज भी बारी समाज और पूरा राष्ट्र उन्हें नमन करता है। शहीद भगवती प्रसाद बारी की गाथा आने वाली पीढ़ियों को संदेश देती है। स्वतंत्रता वीरों की आहुति से ही अमर होती है।

