
नई दिल्ली, 16 मार्च (अशोक “अश्क”) अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा जा सकता है। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार के पास इतना कर बफर मौजूद है कि वह एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक की कीमतों का दबाव झेल सकती है।सोमवार को जारी एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार सरकार पेट्रोल पर 19.9 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.8 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी घटाकर खुदरा ईंधन कीमतों को नियंत्रित रख सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली जाती है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय हो जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत कच्चे तेल की कीमतों में करीब 40 से 45 डॉलर प्रति बैरल तक की बढ़ोतरी का बोझ टैक्स कटौती के जरिए संभाल सकता है। लेकिन इससे अधिक वृद्धि होने पर सरकार के लिए कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल हो जाएगा और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।विश्लेषण में यह भी बताया गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से तेल विपणन कंपनियों के पेट्रोल और डीजल मार्जिन में लगभग 6.3 रुपये प्रति लीटर की कमी आ सकती है। वहीं एलपीजी की कीमत करीब 10.2 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ने की आशंका है। इससे एलपीजी की अंडर-रिकवरी सालाना आधार पर करीब 328 अरब रुपये तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर रिफाइनिंग मार्जिन में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन इससे विपणन और एलपीजी से होने वाले नुकसान की पूरी भरपाई संभव नहीं है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि भारत के एलएनजी आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा होर्मुज मार्ग से गुजरता है, जिससे वैश्विक तनाव की स्थिति में गैस आपूर्ति पर जोखिम बढ़ सकता है।

