समस्तीपुर (अशोक “अश्क”) जिले के करीब 13 लाख रैयतों तक ऑनलाइन जमाबंदी की कॉपी पहुंचाने के लिए राजस्व विभाग ने विशेष महाअभियान की शुरुआत कर दी है। 16 अगस्त से 15 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत राजस्व विभाग के कर्मचारी पंचायत स्तर पर घर-घर जाकर रैयतों को उनकी ऑनलाइन जमाबंदी की प्रति दे रहे हैं। इसके लिए जिले के सभी अंचलों में पहले से ही प्रिंटेड जमाबंदी कॉपी भेजी जा चुकी है।

इस महाअभियान के दौरान सिर्फ जमाबंदी की प्रति वितरण ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी त्रुटियों को भी सुधारा जाएगा। जिन रैयतों की जमाबंदी किसी कारणवश डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाई है, उन्हें भी जोड़ा जाएगा। वहीं, साझा या मृत रैयतों की जमाबंदी में भी सुधार कर उसे अद्यतन किया जाएगा।
जिन रैयतों को कोई त्रुटि या समस्या है, उनके समाधान के लिए 19 अगस्त से 20 सितंबर तक पंचायत स्तर पर विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में रैयत अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इन शिकायतों का समाधान 21 सितंबर से 30 सितंबर के बीच किया जाएगा।
राजस्व विभाग द्वारा पूरे जिले में इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए माइक्रो प्लान तैयार किया जा रहा है। सभी अंचलों में राजस्व कर्मचारियों की टीम जमाबंदी वितरण में लगी हुई है। साथ ही जिले और अंचल स्तर के पदाधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है ताकि अभियान व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से संचालित हो सके।
राजस्व महाअभियान की निगरानी के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जोड़ा गया है। इन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे अभियान की प्रगति की निगरानी करें और किसी प्रकार की अनियमितता न होने दें।
इस अभियान की पारदर्शिता और जानकारी को लेकर बिहार भूमि पोर्टल पर सभी सूचनाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जैसे हल्का स्तर पर किस दिन विशेष शिविर आयोजित होगा, डोर-टू-डोर जमाबंदी वितरण की तिथि, संबंधित राजस्व कर्मचारी का नाम और संपर्क विवरण इत्यादि। राजस्व महाअभियान लिंक पर जाकर रैयत इन सभी जानकारियों को देख सकते हैं। इसके अलावा संबंधित पंचायत जनप्रतिनिधियों से भी मदद ली जा सकती है।
महाअभियान के अंतर्गत मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं
छूटे जमाबंदियों को जोड़ना जो रैयत रिकॉर्ड से बाहर रह गए हैं, उन्हें डिजिटल रिकॉर्ड में जोड़ना।
डिजिटल जमाबंदी की त्रुटियों का सुधार जैसे कि नाम, खाता
संख्या, लगान आदि की अशुद्धियों को ठीक करना।
उत्तराधिकार नामांतरण मृत रैयतों की भूमि का नामांतरण उत्तराधिकारियों के नाम पर किया जाना।
बंटवारा नामांतरण संयुक्त जमाबंदी को आपसी सहमति या कोर्ट के आदेश के आधार पर अलग करना।
यह अभियान रैयतों के भूमि स्वामित्व को पारदर्शी और कानूनी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

