
बक्सर, 19 जनवरी (विक्रांत) दानापुर रेल मंडल के हावड़ा–दिल्ली मुख्य मार्ग पर सोन नदी के ऊपर स्थित ऐतिहासिक कोईलवर रेल-सह-सड़क पुल, जिसे अब्दुल बारी पुल के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर सुर्खियों में है। भोजपुर जिले के बिहटा और कोईलवर स्टेशनों के बीच वर्ष 1862 में ब्रिटिश काल में निर्मित यह डबल डेकर पुल आज भी निर्बाध रेल और सड़क यातायात का मजबूत आधार बना हुआ है। 1.44 किलोमीटर लंबे इस पुल का निर्माण उच्च गुणवत्ता वाले रॉट आयरन से किया गया था, जिसके मजबूत पिल्लर आज भी समय की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं।

रेलवे प्रशासन द्वारा इस पुल की चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग की जाती है, वहीं प्रतिदिन की-मैन द्वारा फिटिंग्स की जांच सुनिश्चित की जाती है। ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण यह पुल सोन नदी के दोनों किनारों को जोड़ते हुए भोजपुर (आरा) को राजधानी पटना से जोड़ता है। एशिया का अपने समय का सबसे लंबा पुल रहा यह ढांचा आज भारत का सबसे पुराना चालू रेल-सह-सड़क पुल है, जिसका उद्घाटन तत्कालीन वायसराय लॉर्ड एल्गिन ने किया था।वर्तमान में पुल का उन्नयन एवं अपग्रेडेशन कार्य तेज गति से चल रहा है।

नए डिजाइन के एच-बीम स्लीपर, चेकर प्लेट की अदला-बदली और गर्डर की पेंटिंग जैसे कार्य किए जा रहे हैं, जिससे इसकी आयु और बढ़ेगी। सीनियर डीईएन श्री उत्पल कांत के नेतृत्व में यह कार्य संपन्न हो रहा है। वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री अभिनव सिद्धार्थ ने बताया कि 160 वर्षों से अधिक समय से निर्बाध सेवा दे रहा यह पुल आने वाले दशकों तक देश की सेवा करता रहेगा।

